Empowerment: बदलते बस्तर की नई तस्वीर: बंदूक छोड़ रैंप पर उतरीं आत्मसमर्पित नक्सली महिलाएं; तालियों से गूंजा सभागार
राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर आयोजित स्वदेशी प्रदर्शनी में दिखी बस्तर की नई भोर; छत्तीसगढ़ी कोसा सिल्क व हैंडलूम परिधानों में बिखेरी खूबसूरती की छटा

रायपुर, 14 अगस्त 2026 : राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के उपलक्ष्य में राजधानी रायपुर में आयोजित प्रदेश स्तरीय बुनकर सम्मेलन एवं स्वदेशी प्रदर्शनी में बदलते बस्तर की एक नई और प्रेरणादायक तस्वीर देखने को मिली। कभी बस्तर के बीहड़ों में बंदूक और हिंसा के खौफनाक साए में जीवन बिताने के लिए मजबूर आत्मसमर्पित नक्सली महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास और गरिमा के साथ मंच पर आकर रैंप वॉक किया।
इस स्वदेशी प्रदर्शनी में जब इन महिलाओं ने छत्तीसगढ़ के पारंपरिक कोसा सिल्क, टसर और हैंडलूम परिधानों को धारण कर मंच पर कदम रखे, तो पूरा सभागार दर्शकों की करतल ध्वनि और तालियों से गूंज उठा। हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में शामिल हुईं इन महिलाओं की यह वॉक केवल फैशन शो तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह बस्तर में आ रहे सकारात्मक सामाजिक बदलाव, पुनर्वास और महिला सशक्तिकरण का जीवंत प्रतीक बनकर उभरी।
समारोह में उपस्थित गणमान्य नागरिकों, जनप्रतिनिधियों और दर्शकों ने आत्मसमर्पित महिलाओं के इस अभूतपूर्व आत्मविश्वास की भूरि-भूरि प्रशंसा की। राज्य सरकार की पुनर्वास नीति और कौशल विकास योजनाओं के माध्यम से अब बस्तर के युवा और महिलाएं हिंसा का त्याग कर स्वावलंबन, कला, संस्कृति और विकास के नए रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।



