छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Women Success Story: फोटो कॉपी, मशरूम और महुआ कारोबार से बबली यादव ने बनाई आत्मनिर्भरता की राह

चुकतीपानी की बबली यादव ने बिहान से जुड़कर फोटो कॉपी, कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से अपनी आजीविका मजबूत की। उनकी मासिक आय करीब 10 हजार रुपये है।

Chhattisgarh Women Success Story, 21 सितंबर 2026। ग्राम पंचायत चुकतीपानी की बबली यादव ने मेहनत, हुनर और उपलब्ध अवसरों का उपयोग करते हुए अपनी आजीविका को मजबूत बनाया है। ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से जुड़ने के बाद उन्होंने फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी जैसी कई गतिविधियों को अपनाया। इन अलग-अलग आय स्रोतों से उन्हें हर महीने करीब 10 हजार रुपये की आमदनी होने लगी है।

बिहान से जुड़कर शुरू किया स्वरोजगार

बबली यादव जागृति महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष हैं। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने ऋण की सहायता से कंप्यूटर खरीदा और घर से ही फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर संबंधी काम शुरू किया। छोटे स्तर से शुरू हुआ यह व्यवसाय धीरे-धीरे उनकी नियमित आय का माध्यम बन गया।

उनके काम से गांव के लोगों को भी स्थानीय स्तर पर सुविधा मिलने लगी। फोटो कॉपी, प्रिंटिंग और कंप्यूटर से जुड़े छोटे कामों के लिए ग्रामीणों को अब बाहर जाने की जरूरत कम हुई।

मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से बढ़े आय के रास्ते

बबली ने अपनी आजीविका को केवल एक व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कम जगह में मशरूम उत्पादन शुरू किया, जिससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी मिलने लगी। इसके साथ ही पीजी समूह के माध्यम से महुआ खरीदी के कार्य से भी जुड़ीं।

इन गतिविधियों ने उनकी आय के स्रोतों को बढ़ाया। साथ ही, महुआ खरीदी से जुड़ी गतिविधियों के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं को भी आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने का अवसर मिला।

करीब 10 हजार रुपये मासिक आय

बबली यादव के अनुसार, फोटो कॉपी एवं कंप्यूटर कार्य, मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी से उनकी मासिक आय लगभग 10 हजार रुपये तक पहुंचती है। इस आय से परिवार की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने में सहयोग मिल रहा है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ उनके भीतर निर्णय लेने का आत्मविश्वास भी बढ़ा है। अब वे स्वयं आगे बढ़ने के साथ दूसरी महिलाओं को भी स्वरोजगार और स्व-सहायता समूहों से जुड़ने के लिए प्रेरित करती हैं।

सरकारी योजनाओं से मिला अतिरिक्त संबल

बबली यादव को प्रधानमंत्री आवास योजना और महतारी वंदन योजना का लाभ भी मिला है। उनके अनुसार, इन योजनाओं और बिहान से जुड़ने के बाद उन्हें आगे बढ़ने के लिए आवश्यक सहयोग और अवसर मिला।

स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं को वित्तीय सहायता, प्रशिक्षण और आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की व्यवस्था ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है। बबली की कहानी इसी तरह के प्रयासों से जुड़े एक स्थानीय अनुभव को सामने रखती है।

छोटे प्रयासों से बनी अलग पहचान

बबली की शुरुआत कंप्यूटर और फोटो कॉपी के छोटे व्यवसाय से हुई। इसके बाद उन्होंने मशरूम उत्पादन और महुआ खरीदी को भी अपनी आजीविका से जोड़ा। अलग-अलग गतिविधियों को साथ लेकर चलने से उनकी आय का आधार मजबूत हुआ।

चुकतीपानी की यह कहानी बताती है कि उचित मार्गदर्शन, समूह का सहयोग और आर्थिक अवसर मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपने स्थानीय संसाधनों और कौशल के जरिए स्वरोजगार की राह बना सकती हैं। बबली यादव अब अपने परिवार की आर्थिक जरूरतों में योगदान देने के साथ अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की संभावना का उदाहरण बन रही हैं।

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