शांति कश्यप को सड्डू में जमीन का आवंटन ही नहीं, प्रस्तावित भूखंड को ‘करोड़ों का घोटाला’ बताने पर उठे सवाल

बोलभारत 24 रायपुर।रायपुर विकास प्राधिकरण की लाभांडी-कचना-सड्डू नगर विकास योजना को लेकर मंत्री केदार कश्यप और उनकी पत्नी शांति कश्यप का नाम जोड़कर लगाए जा रहे जमीन घोटाले के आरोपों के बीच महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक शांति कश्यप के व्यक्तिगत नाम पर सड्डू में किसी जमीन के अंतिम आवंटन की पुष्टि नहीं होती। विवाद राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े एक प्रस्तावित फाइनल प्लॉट को लेकर है और RDA के अनुसार पूरी प्रक्रिया अभी अंतिम नहीं हुई है।
राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड में शांति कश्यप निदेशक हैं। कंपनी की करीब 1.33 एकड़ मूल भूमि कचना क्षेत्र में बताई गई है। नगर विकास योजना के तहत भूमि के पुनर्गठन की प्रक्रिया में करीब 23,327 वर्गफीट का फाइनल प्लॉट प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख सामने आया है। इसी प्रस्ताव को आधार बनाकर विपक्ष ने आरोप लगाया कि कचना की जमीन के बदले सड्डू क्षेत्र में अधिक मूल्यवान जमीन दी जा रही है।
अंतिम आवंटन नहीं, दावा-आपत्ति की प्रक्रिया अभी जारी
मामले का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि RDA की प्रक्रिया अभी अंतिम चरण तक नहीं पहुंची है। RDA CEO अवनीश शरण के हवाले से प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार भूखंडों को लेकर दावा-आपत्ति आमंत्रित की गई है। प्राप्त आपत्तियों का संबंधित समिति परीक्षण करेगी और उसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
ऐसे में प्रस्तावित फाइनल प्लॉट को सीधे अंतिम रूप से आवंटित जमीन बताकर उसके आधार पर करोड़ों रुपये के घोटाले का निष्कर्ष निकालना प्रक्रिया की मौजूदा स्थिति को पूरी तरह नहीं दर्शाता।
20 करोड़ की कीमत भी RDA का आधिकारिक आंकड़ा नहीं
विवाद में जिस भूखंड को करीब 20 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है, वह भी RDA द्वारा घोषित आधिकारिक मूल्यांकन नहीं है। प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक यह आंकड़ा शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तावित MR-43 सड़क विकसित होने के बाद जमीन के संभावित बाजार मूल्य के अनुमान के रूप में सामने रखा गया है।
इसलिए “20 करोड़ की जमीन दे दी गई” जैसे दावे में दो महत्वपूर्ण अंतर हैं—पहला, अंतिम आवंटन की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है और दूसरा, 20 करोड़ रुपये की कीमत RDA का आधिकारिक मूल्यांकन नहीं है।
RDA ने भी नकारे पक्षपात के आरोप
RDA की ओर से किसी एक कंपनी को विशेष लाभ दिए जाने के आरोपों को खारिज किया गया है। प्राधिकरण का पक्ष है कि योजना के तहत बड़े भूखंडों के लिए निर्धारित नीति और फॉर्मूले के अनुसार पुनर्गठन किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार RDA का कहना है कि मुख्य सड़क से जुड़े भूखंड केवल राधिका पैलेस के लिए प्रस्तावित नहीं किए गए, बल्कि समान नियमों के तहत अन्य भू-स्वामियों के भूखंड भी सड़क से जोड़े गए हैं।
RDA ने लगभग 1.33 एकड़ मूल भूमि के अनुपात में करीब 23 हजार वर्गफीट का प्रस्तावित भूखंड दिए जाने को योजना में लागू नीति और निर्धारित फॉर्मूले के अनुरूप बताया है।
आरोप अपनी जगह, दस्तावेज और अंतिम प्रक्रिया बताएगी वास्तविक स्थिति
विपक्ष ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है और मूल भूमि तथा प्रस्तावित फाइनल प्लॉट की लोकेशन में अंतर को लेकर आपत्ति जताई है। इसलिए इन सवालों की जांच और RDA की दावा-आपत्ति प्रक्रिया का अंतिम परिणाम महत्वपूर्ण रहेगा।
लेकिन मौजूदा स्थिति में शांति कश्यप के व्यक्तिगत नाम पर सड्डू में करोड़ों की कमर्शियल जमीन का अंतिम आवंटन हो जाने और 20 करोड़ रुपये की जमीन दिए जाने जैसी बातों को अंतिम स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना उपलब्ध जानकारी से पुष्ट नहीं होता।
सोशल मीडिया के दौर में आरोप और प्रमाणित तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना आवश्यक है। किसी प्रस्तावित प्रक्रिया को अंतिम आवंटन और अनुमानित बाजार मूल्य को आधिकारिक कीमत बताने से खबर का अर्थ बदल सकता है। ऐसे मामलों में आरोप लगाने वाले पक्ष के साथ RDA के आधिकारिक रिकॉर्ड, लागू नियम और अंतिम आदेश को भी समान रूप से सामने रखना जरूरी है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी का स्पष्ट निष्कर्ष इतना है कि मामला एक प्रस्तावित फाइनल प्लॉट और उस पर चल रही दावा-आपत्ति प्रक्रिया का है; अंतिम आवंटन का निर्णय अभी बाकी बताया गया है।



