Balodabazar Land Dispute: जमीन के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ी, सुनीता शर्मा ने CM से मांगा न्याय
बलौदाबाजार के पलारी क्षेत्र में सुनीता शर्मा ने जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। महिला ने मुख्यमंत्री से उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

Balodabazar Land Dispute-भाटापारा। छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के पलारी तहसील अंतर्गत ग्राम बटगन निवासी सुनीता शर्मा ने अपनी जमीन के राजस्व अभिलेखों में कथित फर्जीवाड़े का आरोप लगाया है। महिला ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को आवेदन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। उन्होंने दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के साथ-साथ मामले में संलिप्त अधिकारी-कर्मचारियों के विरुद्ध भी नियमानुसार कार्रवाई करने की अपील की है।
तीन खसरों की जमीन के रिकॉर्ड में बदलाव का आरोप
सुनीता शर्मा के आवेदन के अनुसार, उनकी भूमि ग्राम बटगन, पटवारी हल्का नंबर 20, राजस्व निरीक्षक मंडल गिरपुरी और तहसील पलारी में स्थित है। आवेदन में खसरा नंबर 265/17, रकबा 0.1010 हेक्टेयर, खसरा नंबर 473/3, रकबा 0.0830 हेक्टेयर और खसरा नंबर 541/53, रकबा 0.2100 हेक्टेयर का उल्लेख किया गया है। तीनों खसरों का कुल रकबा लगभग 0.3940 हेक्टेयर है।
महिला का दावा है कि पुराने खसरा पांचसाला, किसान पुस्तिका और अन्य राजस्व अभिलेखों में भूमि पर उनके अधिकार से संबंधित प्रविष्टियां दर्ज हैं। इसके बावजूद उनकी जानकारी और सहमति के बिना ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई है। आवेदन में उपलब्ध ऑनलाइन नामांतरण प्रकरण के विवरण के अनुसार, वर्तमान भूमिस्वामी के रूप में सुनीता और प्रस्तावित भूमिस्वामी के रूप में भगवती का नाम दर्ज होने की बात कही गई है।
30 मार्च 2025 को नामांतरण निरस्त होने का उल्लेख
आवेदन में महिला ने ऑनलाइन विवरण का हवाला देते हुए बताया है कि अपूर्ण अथवा त्रुटिपूर्ण आवेदन के कारण 30 मार्च 2025 को नामांतरण निरस्त किए जाने का उल्लेख मिलता है। उन्होंने मांग की है कि यदि इसके बाद भी संबंधित भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य व्यक्ति का नाम दर्ज किया गया है, तो इसकी विस्तृत जांच होनी चाहिए।
महिला ने सवाल उठाया है कि रिकॉर्ड में बदलाव किस आवेदन, दस्तावेज, आदेश और वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर किया गया। उनका कहना है कि मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए केवल वर्तमान ऑनलाइन रिकॉर्ड देखना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पुराने और मूल राजस्व अभिलेखों की भी जांच जरूरी है।
मूल दस्तावेजों से लेकर डिजिटल हिस्ट्री तक जांच की मांग
सुनीता शर्मा ने मामले की जांच के लिए मूल मिसल अभिलेख, बी-1, खसरा पांचसाला, किसान पुस्तिका, नामांतरण पंजी, नामांतरण आवेदन और आदेश सहित संबंधित दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है। इसके अलावा, नोटिस की तामीली, कथित सहमति पत्र, हस्ताक्षर और रजिस्ट्री अथवा विलेख की सत्यता की जांच कराने की भी अपील की गई है।
उन्होंने ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड में हुए प्रत्येक बदलाव की डिजिटल हिस्ट्री और लॉग की जांच कर यह पता लगाने की मांग की है कि रिकॉर्ड में परिवर्तन कब, किसके माध्यम से और किस आधार पर किया गया। महिला ने यह भी कहा है कि जांच के दौरान तीनों खसरों से संबंधित पुराने और वर्तमान मूल राजस्व अभिलेखों को सुरक्षित रखा जाना चाहिए, ताकि किसी तरह की छेड़छाड़ की आशंका न रहे।
चार साल की बेटी का हवाला, मानसिक और आर्थिक परेशानी की बात
आवेदन में सुनीता शर्मा ने अपनी चार वर्षीय बेटी का उल्लेख करते हुए कहा है कि वह लंबे समय से अपने भूमि संबंधी मामले के निराकरण के लिए राजस्व कार्यालयों के चक्कर लगा रही हैं। उनके अनुसार, लगातार प्रयासों के बावजूद समस्या का समाधान नहीं होने से उन्हें मानसिक, आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
महिला ने आवेदन में अपनी गहरी निराशा व्यक्त करते हुए आत्मदाह जैसे विचार आने की बात भी लिखी है। उन्होंने शासन से न्याय दिलाने के साथ अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और भूमि संबंधी प्रकरण का तत्काल समयबद्ध निराकरण कराने की मांग की है।
नामांतरण और रिकॉर्ड में बदलाव पर रोक लगाने की अपील
पीड़िता ने कलेक्टर स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों की टीम गठित कर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही, जांच पूरी होने तक संबंधित भूमि पर नया नामांतरण, हस्तांतरण अथवा राजस्व रिकॉर्ड में किसी अन्य प्रकार का बदलाव रोकने की अपील की है, ताकि विवादित भूमि के संबंध में आगे कोई ऐसी कार्रवाई न हो, जिससे उनका मामला और जटिल हो जाए।
सुनीता शर्मा ने मांग की है कि यदि जांच में फर्जीवाड़ा, कूटरचना या अनधिकृत रूप से राजस्व रिकॉर्ड में बदलाव किए जाने की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार व्यक्तियों और संलिप्त अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए। साथ ही, गलत या अवैधानिक प्रविष्टियों को निरस्त कर भूमि अभिलेखों को नियमानुसार दुरुस्त किया जाए। फिलहाल, आवेदन में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और प्रशासनिक जांच के निष्कर्ष सामने आना बाकी है।



