छत्तीसगढ़

Cyber Awareness Campaign: छत्तीसगढ़ में साइबर जागरूकता अभियान से 1.70 करोड़ लोग जुड़े, ट्रैफिक हैकाथॉन के विजेताओं का सम्मान

छत्तीसगढ़ में सात सप्ताह के साइबर जागृति अभियान से 1.70 करोड़ लोगों तक जागरूकता संदेश पहुंचा। ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 में युवाओं ने रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने के सुझाव दिए।

रायपुर, 9 अक्टूबर 2026। डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों से नागरिकों को सुरक्षित रखने के लिए जागरूकता और जनभागीदारी जरूरी है। साइबर सुरक्षा केवल पुलिस और शासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक नागरिक का साझा दायित्व है। साइबर जागरूकता को जनआंदोलन का स्वरूप देकर ही साइबर ठगी और डिजिटल अपराधों से सुरक्षित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा आयोजित साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 के अभिनंदन समारोह को संबोधित करते हुए यह बात कही। कार्यक्रम में साइबर जागरूकता के लिए अभिनव पहल करने वाले जिलों और ट्रैफिक हैकाथॉन के विजेताओं को सम्मानित किया गया।

Digital India: डिजिटल सुविधाओं के साथ साइबर सुरक्षा भी जरूरी

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में डिजिटल इंडिया अभियान ने देश में बड़े बदलाव किए हैं। वर्ष 2014 में डिजिटल इंडिया की परिकल्पना प्रस्तुत किए जाने के समय देश की विशाल आबादी और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल अर्थव्यवस्था की सफलता को लेकर कई आशंकाएं थीं। आज गांवों में रहने वाले सामान्य नागरिक भी मोबाइल फोन के माध्यम से डिजिटल भुगतान कर रहे हैं और तकनीक के जरिए देश-दुनिया से जुड़े हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटल सुविधाओं ने लोगों का जीवन आसान बनाया है, लेकिन इसके साथ साइबर ठगी और ऑनलाइन अपराधों की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। कई बार तकनीकी जानकारी रखने वाले लोग भी ठगी का शिकार हो जाते हैं। इसलिए प्रत्येक नागरिक को साइबर अपराधों के तरीकों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना आवश्यक है।

Cyber Awareness Campaign: सात सप्ताह में 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा संदेश

छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक सात सप्ताह का विशेष साइबर जागृति अभियान चलाया। मुख्यमंत्री ने इस अभियान की सराहना करते हुए कहा कि इसके माध्यम से शहरों से लेकर गांवों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचाया गया।

अभियान के दौरान अलग-अलग विषयों पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की गईं। विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ग्राम पंचायतों, हाट-बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर कार्यक्रमों के जरिए लोगों को साइबर अपराधों से बचाव की जानकारी दी गई। इस दौरान 5 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए और 5 लाख से ज्यादा सेल्फी के माध्यम से नागरिकों की भागीदारी दर्ज की गई। अभियान के जरिए लगभग 1 करोड़ 70 लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी से स्पष्ट है कि साइबर सुरक्षा अब केवल तकनीकी विषय नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रत्येक परिवार और नागरिक के जीवन से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन चुका है।

अभियान खत्म नहीं, साइबर जागरूकता की नई शुरुआत

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सात सप्ताह का अभियान पूरा होने का अर्थ साइबर जागरूकता की गतिविधियों का समाप्त होना नहीं है। यह केवल एक शुरुआत है और आगे भी अभियान निरंतर जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के प्रत्येक नागरिक को सुरक्षित और भयमुक्त वातावरण उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके लिए पुलिस और प्रशासन के साथ सामाजिक संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, युवाओं और आम नागरिकों को भी सक्रिय भूमिका निभानी होगी। विशेष रूप से युवाओं को साइबर प्रहरी बनकर अपने परिवार और समाज को जागरूक करना चाहिए।

Traffic Hackathon 2026: रायपुर की यातायात व्यवस्था सुधारने पर होगा विचार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 की सराहना करते हुए कहा कि रायपुर में आबादी और वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इससे यातायात प्रबंधन की चुनौतियां भी बढ़ी हैं। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और आवागमन को सुरक्षित एवं सुगम बनाने के लिए तकनीक, नवाचार और जनभागीदारी का समन्वय आवश्यक है।

हैकाथॉन में विद्यार्थियों, युवाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और विभिन्न संस्थाओं ने राजधानी की यातायात समस्याओं का अध्ययन कर व्यावहारिक समाधान प्रस्तुत किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इन सुझावों पर गंभीरता से विचार करेगी और उपयोगी एवं व्यवहारिक समाधानों को लागू करने की दिशा में कदम उठाएगी।

कार्यक्रम में ट्रैफिक हैकाथॉन के ओवरऑल विजेता कार्तिकेय पंत ने शंकर नगर टर्निंग पॉइंट की यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए ‘टैक्टिकल अर्बनिज्म’ पर आधारित मॉडल प्रस्तुत किया। इसमें सड़क क्षेत्र के बेहतर उपयोग, स्पष्ट लेन मार्किंग, पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित स्थान, स्ट्रीट वेंडरों और ऑटोरिक्शा चालकों के लिए व्यवस्थित जगह तथा यातायात प्रवाह में सुधार के सुझाव शामिल थे।

प्रतिभागियों ने टाटीबंध चौक, तेलीबांधा मरीन ड्राइव, आमापारा चौक, लोधीपारा चौक और शंकर नगर जैसे प्रमुख यातायात दबाव वाले क्षेत्रों का अध्ययन किया। उनके सुझावों में पार्किंग प्रबंधन, सुरक्षित पैदल मार्ग, सार्वजनिक परिवहन के एकीकरण, लेन मार्किंग और जाम कम करने के उपाय शामिल रहे।

Smart Traffic Management: एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स से यातायात सुधारने की योजना

ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) आधारित स्मार्ट ट्रैफिक प्रबंधन के सुझाव भी दिए। ‘रायपुर नेत्र’ और ‘दृष्टि’ जैसी प्रस्तावित परियोजनाओं में सीसीटीवी कैमरों और एआई तकनीक के माध्यम से यातायात नियमों के उल्लंघन की पहचान, जाम की पूर्व सूचना और एम्बुलेंस तथा अग्निशमन वाहनों के लिए ग्रीन कॉरिडोर तैयार करने जैसी अवधारणाएं शामिल रहीं।

हैकाथॉन के आयोजन में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) रायपुर और द इंस्टीट्यूशन ऑफ इंजीनियर्स (इंडिया) के छत्तीसगढ़ स्टेट सेंटर ने तकनीकी सहयोग दिया। विशेषज्ञों ने दो चरणों में प्रतिभागियों के प्रस्तावों का मूल्यांकन कर उनकी तकनीकी व्यवहार्यता, उपयोगिता और क्रियान्वयन की संभावनाओं का आकलन किया। आयोजन में शिवाशा फाउंडेशन का भी सहयोग रहा।

Chief Minister Rural Bus Service: दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंच रही बस सेवा

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में आवागमन की सुविधा विकास की बुनियादी जरूरत है। पहले सार्वजनिक परिवहन की कमी के कारण ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य, बाजार और अन्य आवश्यक कार्यों के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ग्रामीण बस सेवा शुरू की गई है। बस्तर सहित उन दूरस्थ क्षेत्रों में भी बस सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जो लंबे समय तक नक्सलवाद से प्रभावित रहे हैं। ऐसे मार्गों पर 100 से अधिक बसों का संचालन किया जा रहा है, जहां आर्थिक रूप से लाभकारी नहीं होने के कारण पहले बस सेवाएं उपलब्ध नहीं थीं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने लाभ-हानि से ऊपर उठकर जनहित को प्राथमिकता दी है और इन मार्गों पर बस संचालन से होने वाली आर्थिक क्षति की भरपाई की व्यवस्था की है। उन्होंने बताया कि ग्रामीणों के साथ बस में यात्रा के दौरान उन्होंने स्वयं महसूस किया है कि यह सेवा लोगों के जीवन में सुविधा और खुशियां ला रही है।

Deputy CM Vijay Sharma: साइबर अपराधों पर कार्रवाई से एफआईआर में कमी

उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने कहा कि दुनिया में होने वाले डिजिटल लेनदेन का लगभग 50 प्रतिशत भारत में होता है। यह डिजिटल इंडिया अभियान की बड़ी उपलब्धि है। हालांकि डिजिटल भुगतान के विस्तार के साथ साइबर अपराधों से सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है।

उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर जागृति अभियान के माध्यम से धार्मिक आयोजनों, चौक-चौराहों, ग्राम सभाओं, ग्राम पंचायतों, विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और विद्यालयों तक पहुंचकर लोगों को ऑनलाइन ठगी से बचने के तरीके बताए।

उप मुख्यमंत्री ने बताया कि पुलिस साइबर अपराधियों के नेटवर्क के विरुद्ध भी कार्रवाई कर रही है। साइबर ठगी में इस्तेमाल होने वाले म्यूल बैंक खातों को खोलने में संलिप्त बैंककर्मियों से लेकर फर्जी सिम उपलब्ध कराने वालों तक के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उनके अनुसार, इन प्रयासों से साइबर अपराधों से संबंधित एफआईआर में कमी आई है और ठगी गई राशि की रिकवरी दर में भी वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए केवल पुलिस और प्रशासन के प्रयास पर्याप्त नहीं हैं। समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जनभागीदारी और नवाचार जरूरी हैं। इसी उद्देश्य से ट्रैफिक हैकाथॉन आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं ने उपयोगी और व्यावहारिक सुझाव दिए।

Cyber Safety: सात विषयों पर चलाया गया जागरूकता अभियान

छत्तीसगढ़ पुलिस की 34 पुलिस इकाइयों के समन्वय से चलाए गए साइबर जागृति अभियान में सात विषय आधारित सप्ताहों के माध्यम से नागरिकों को जागरूक किया गया। इनमें डिजिटल सुरक्षा, वित्तीय धोखाधड़ी एवं यूपीआई सुरक्षा, डिजिटल अरेस्ट, महिलाओं की ऑनलाइन सुरक्षा, रोजगार संबंधी ठगी, डेटा गोपनीयता और सामूहिक संकल्प जैसे विषय शामिल थे।

कार्यक्रमों के दौरान नागरिकों को बताया गया कि ओटीपी और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करना चाहिए। संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने, फर्जी निवेश योजनाओं में पैसा लगाने और अनजान लोगों के साथ संवेदनशील जानकारी साझा करने से बचना चाहिए। लोगों को डिजिटल अरेस्ट जैसे नए तरीकों से होने वाली ठगी की पहचान करने के बारे में भी जानकारी दी गई।

अभियान में युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़कर परिवार और समाज तक जागरूकता पहुंचाने की पहल की गई। नागरिकों को साइबर ठगी होने पर तत्काल हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल का उपयोग करने के लिए भी प्रेरित किया गया।

Social Media Campaign: 6.02 करोड़ से अधिक बार देखे गए जागरूकता संदेश

साइबर जागृति अभियान में सोशल मीडिया का व्यापक उपयोग किया गया। फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप के माध्यम से साइबर सुरक्षा से संबंधित संदेश और जागरूकता सामग्री प्रसारित की गई।

भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के सहयोग से अभियान के दौरान 3,100 से अधिक सोशल मीडिया पोस्ट साझा की गईं। इन पोस्ट को 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। आई4सी ने भी अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अभियान से जुड़ी पोस्ट साझा कीं, जिससे जागरूकता संदेश की पहुंच और बढ़ी।

District Initiatives: जिलों ने अपनाए जागरूकता के नए तरीके

साइबर जागृति अभियान के दौरान विभिन्न जिलों ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप अलग-अलग पहल कीं। मुंगेली जिले में विशेष ग्राम सभाओं के माध्यम से लगभग 15 हजार ग्रामीणों को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक किया गया। गरियाबंद जिले में मितानिनों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्व-सहायता समूहों की लगभग 493 महिलाओं को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी गई, ताकि वे अपने परिवारों तक यह संदेश पहुंचा सकें।

दुर्ग जिले में ‘सुरक्षित दुर्ग, साइबर जागरूक दुर्ग’ अभियान के तहत विद्यार्थियों ने नुक्कड़ नाटकों और अन्य गतिविधियों के माध्यम से 15 हजार से अधिक नागरिकों को जागरूक किया। रायपुर में आयोजित साइबर जागरूकता लघु फिल्म प्रतियोगिता में 11 राज्यों के 35 जिलों से 162 फिल्में प्राप्त हुईं। इन फिल्मों के जरिए लगभग दो लाख लोगों तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचने का अनुमान है।

जांजगीर-चांपा जिले में ‘एक राखी साइबर जागृति के नाम’ अभियान के माध्यम से लगभग 1 लाख 61 हजार नागरिकों तक जागरूकता पहुंचाई गई। वहीं बिलासपुर जिले में आकाशवाणी के विशेष फोन-इन कार्यक्रम के माध्यम से लगभग आठ लाख श्रोताओं तक साइबर सुरक्षा का संदेश पहुंचा। समारोह में इन अभिनव प्रयासों के लिए संबंधित जिलों को सम्मानित किया गया।

समारोह में जनप्रतिनिधि और अधिकारी रहे उपस्थित

विधायक राजेश मूणत ने कहा कि रायपुर की यातायात व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और सुगम बनाने के लिए सभी संबंधित विभागों को बेहतर समन्वय के साथ काम करना होगा। यातायात समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक योजना के साथ व्यावहारिक कदम उठाना जरूरी है।

समारोह में छत्तीसगढ़ रजककार बोर्ड के अध्यक्ष प्रह्लाद रजक, विधायक राजेश मूणत, रायपुर नगर निगम की महापौर मीनल चौबे, पुलिस महानिदेशक अरुण गौतम, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार सहित जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, तकनीकी विशेषज्ञ, विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।

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