Women Empowerment Chhattisgarh: महतारी वंदन से 68 लाख महिलाओं को लाभ, 14 लाख बनीं लखपति दीदी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शक्ति स्वरूपा कार्यक्रम में महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। महतारी वंदन से 68 लाख से अधिक महिलाओं को लाभ, 14 लाख लखपति दीदी और बस्तर में 421 स्कूल दोबारा शुरू होने की जानकारी दी

Women Empowerment Chhattisgarh रायपुर, 11 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ की माताएं, बहनें और बेटियां प्रदेश की सबसे बड़ी ताकत हैं। महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, रोजगार, उद्यमिता और नेतृत्व के अवसर उपलब्ध कराना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। महिलाओं को केवल सरकारी योजनाओं का लाभार्थी नहीं, बल्कि परिवार, समाज और प्रदेश के विकास में सक्रिय भागीदार और नेतृत्वकर्ता बनाना सरकार का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री राजधानी रायपुर में आयोजित शाइनिंग छत्तीसगढ़ ‘शक्ति स्वरूपा’ कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं का सम्मान किया और उनसे संवाद भी किया। उन्होंने शारदीय नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को शक्ति स्वरूपा माना गया है। इसी भावना के साथ महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा, स्वावलंबन और उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
Mahtari Vandan Yojana: 68 लाख से अधिक महिलाओं को आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं को आर्थिक संबल देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना के तहत प्रदेश की 68 लाख से अधिक महिलाओं को प्रतिमाह एक हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। अब तक 32 किस्तों में 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे महिलाओं के खातों में अंतरित की जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि इस सहायता से महिलाओं को अपनी छोटी-छोटी जरूरतों के लिए आर्थिक स्वतंत्रता मिली है। महिलाएं इस राशि का उपयोग बच्चों की पढ़ाई, दवाइयों, पोषण, घरेलू जरूरतों और बचत जैसे कार्यों में कर रही हैं। इससे परिवार के निर्णयों में उनकी भागीदारी और आत्मविश्वास को भी मजबूती मिलने की बात कही गई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि सरकार का प्रयास है कि योजना की पात्र कोई भी महिला लाभ से वंचित न रहे। तकनीकी समस्याओं, दस्तावेजों, आधार या बैंक खाते से जुड़ी त्रुटियों के कारण जिन पात्र महिलाओं को सहायता नहीं मिल पाई है, उनके मामलों की जांच कर समाधान करने का प्रयास किया जा रहा है।
Lakhpati Didi Yojana: लक्ष्य 7.82 लाख, उपलब्धि 14 लाख ग्रामीण महिलाएं
महिलाओं को स्थायी आजीविका और उद्यमिता से जोड़ने के प्रयासों की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लखपति दीदी पहल के अंतर्गत छत्तीसगढ़ ने निर्धारित लक्ष्य से आगे बढ़कर उपलब्धि हासिल की है। प्रदेश में 7.82 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 14 लाख ग्रामीण महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, प्रदेश के 32.39 लाख ग्रामीण परिवार 2.98 लाख स्व-सहायता समूहों से जुड़कर विभिन्न आर्थिक गतिविधियां संचालित कर रहे हैं। इन समूहों की महिलाओं को कृषि आधारित व्यवसाय, खाद्य प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, लघु वनोपज, डेयरी, मशरूम उत्पादन, मिलेट प्रसंस्करण, सिलाई और रेडीमेड वस्त्र निर्माण जैसी गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं के उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने, बेहतर पैकेजिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक पहुंच बढ़ाने पर भी ध्यान दिया जा रहा है। उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से आगे बढ़ाकर सफल उद्यमी बनाना है, ताकि वे दूसरे लोगों को भी रोजगार उपलब्ध करा सकें।
481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी
मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्व-सहायता समूहों और सामुदायिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश में 481 महतारी सदनों के निर्माण को मंजूरी दी गई है। ये केंद्र ग्रामीण महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़ी गतिविधियों के लिए उपयोगी होंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के माध्यम से प्रदेश की 39.73 लाख महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन दिए गए हैं। वहीं, रानी दुर्गावती योजना के लिए 15 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है। इसके तहत पात्र बालिकाओं को 18 वर्ष की आयु पूरी होने पर डेढ़ लाख रुपये की सहायता देने का प्रावधान है।
Bastar Education News: नक्सल हिंसा से बंद 421 स्कूल दोबारा शुरू
महिलाओं और बेटियों की शिक्षा पर जोर देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी बेटी के सपनों के रास्ते में दूरी, गरीबी या असुरक्षा बाधा नहीं बननी चाहिए। दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए छात्रावासों, आश्रमों, आवासीय विद्यालयों और प्रयास संस्थानों के माध्यम से सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि बस्तर में नक्सल हिंसा के कारण लंबे समय तक प्रभावित रहे 421 स्कूलों को दोबारा शुरू किया गया है। उन्होंने इसे क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था को फिर से मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने कहा कि वर्षों बाद इन स्कूलों में बच्चों की चहल-पहल और पढ़ाई की आवाज लौटना बस्तर में हो रहे बदलाव का महत्वपूर्ण उदाहरण है। ओरछा और जगरगुंडा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में एजुकेशन सिटी भी विकसित की जा रही हैं, ताकि आदिवासी अंचलों के बच्चों, विशेषकर बेटियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए अपने गांव और परिवार से बहुत दूर न जाना पड़े।
महिला और बाल स्वास्थ्य पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ महिला ही स्वस्थ परिवार और समाज की मजबूत नींव होती है। महिला एवं बाल स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए आंगनबाड़ी सेवाओं को सुदृढ़ करने, गर्भवती महिलाओं की नियमित स्वास्थ्य जांच, बच्चों के पोषण और किशोरियों में एनीमिया की रोकथाम के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना के तहत प्रदेश में लगभग 2.49 करोड़ आयुष्मान कार्ड जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा, 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 6.21 लाख वय वंदना कार्ड जारी किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में भी गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना प्राथमिकता है, ताकि आर्थिक स्थिति या गांव की दूरी किसी महिला के उपचार में बाधा न बने।
IT और AI समेत आधुनिक क्षेत्रों में महिलाओं के लिए अवसर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बदलती अर्थव्यवस्था में महिलाओं को पारंपरिक आजीविका के साथ आधुनिक तकनीकों और नए उद्योगों से जोड़ना जरूरी है। राज्य की नई औद्योगिक नीति में महिलाओं के रोजगार और स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
सूचना प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), शिक्षा, चिकित्सा, खाद्य प्रसंस्करण और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में महिलाओं के लिए नए अवसर विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता नहीं है। परिवार, समाज, प्रशासन और उद्यमिता से जुड़े निर्णयों में महिलाओं की भागीदारी भी महत्वपूर्ण है। पंचायतों और स्थानीय निकायों से लेकर प्रशासन तक महिलाओं को नेतृत्व के अधिक अवसर मिलने चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में महिला कलेक्टरों की भूमिका भी बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर प्रस्तुत करती है।
छत्तीसगढ़ की बेटियां खेलों में बढ़ा रहीं प्रदेश का गौरव
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की बेटियां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल मंचों पर अपनी प्रतिभा से प्रदेश का गौरव बढ़ा रही हैं। सरकार का प्रयास है कि संसाधनों, प्रशिक्षण या आर्थिक कठिनाइयों के कारण किसी प्रतिभाशाली खिलाड़ी को अपने सपनों से समझौता न करना पड़े।
उन्होंने बताया कि राष्ट्रमंडल खेलों में देश का गौरव बढ़ाने वाली ज्ञानेश्वरी यादव को डीएसपी पद पर पदोन्नति के साथ 30 लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की गई है। वहीं, कोरबा जिले की संजू देवी रावत को भारतीय महिला कबड्डी टीम की उपलब्धियों में योगदान के लिए 50 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी गई है।
मुख्यमंत्री ने छत्तीसगढ़ की किरण पिस्दा का भी उल्लेख किया, जिनका भारतीय सीनियर महिला फुटबॉल टीम में चयन हुआ है। उन्होंने रायपुर की आवासीय बालिका फुटबॉल अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, बस्तर ओलंपिक, सरगुजा ओलंपिक और खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स जैसे आयोजन ग्रामीण तथा जनजातीय क्षेत्रों की बेटियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर दे रहे हैं। वर्ष 2026-27 के बजट में खेल उत्कर्ष मिशन के लिए 100 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मां के संघर्ष और संस्कारों से मिली सेवा की प्रेरणा
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने अपने जीवन के अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि उनका जन्म एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। बचपन में पिता का साया उठ जाने के बाद उन्होंने अपनी मां को कठिन परिस्थितियों में परिवार संभालते और खेती-बाड़ी करते देखा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी मां ने कठिनाइयों के बावजूद बच्चों की शिक्षा और संस्कारों में कमी नहीं आने दी। मां के संघर्ष, सेवाभाव, सनातन मूल्यों के प्रति आस्था और परिवार के प्रति समर्पण ने उनके व्यक्तित्व को प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि जनसेवा और जरूरतमंदों के प्रति संवेदनशीलता की प्रेरणा उन्हें अपने परिवार, विशेषकर अपनी मां से मिली।
युवाओं और बेटियों से बड़े सपने देखने का आह्वान
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की बेटियों और युवाओं से बड़े सपने देखने तथा उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में डिजिटल तकनीक, उभरते उद्योगों, कृषि आधारित व्यवसायों, खाद्य प्रसंस्करण, डेयरी, वनोपज, पर्यटन और सेवा क्षेत्र में रोजगार तथा स्वरोजगार की संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने युवाओं को अपनी रुचि और क्षमता पहचानने के साथ शिक्षा एवं कौशल विकास पर ध्यान देने की सलाह दी। सरकार कौशल विकास और प्रशिक्षण की व्यवस्था मजबूत कर महिलाओं तथा युवाओं को नए अवसरों से जोड़ने का प्रयास कर रही है।
महिलाओं की भागीदारी से विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की वास्तविक शक्ति उसकी माताएं, बहनें और बेटियां हैं। महिलाओं की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करने के साथ निर्णय प्रक्रिया तथा नेतृत्व में उनकी भागीदारी बढ़ाना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि जब महिलाएं आत्मनिर्भर होंगी, बेटियां शिक्षित और सक्षम बनेंगी तथा प्रदेश के विकास में नेतृत्वकारी भूमिका निभाएंगी, तभी विकसित और समृद्ध छत्तीसगढ़ का लक्ष्य साकार होगा।
कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, कैबिनेट मंत्री गुरु खुशवंत साहेब, कार्यक्रम आयोजक संस्था की ब्यूरो प्रमुख निशा द्विवेदी सहित जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और बड़ी संख्या में महिलाएं उपस्थित थीं।



