Agriculture News: दंतेवाड़ा में जैविक कृषि क्रांति: प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने दिया आत्मनिर्भर खेती का मंत्र, मॉडल जिला बनाने की तैयारी
कृषि कार्यशाला में जुटे सैकड़ों किसान और महिला समूह; रासायनिक खादों को छोड़ प्राकृतिक खेती अपनाने का आह्वान, रागी केक और महिला आत्मनिर्भरता की हुई सराहना।

Bol Bharat 24 News- छत्तीसगढ़ के दक्षिण बस्तर अंचल में स्थित दंतेवाड़ा जिले को प्राकृतिक और जैविक कृषि के क्षेत्र में एक नई वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में राज्य सरकार ने एक बेहद मजबूत कदम उठाया है। जिला कृषि विज्ञान केंद्र एवं कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय भव्य ‘जैविक कृषि कार्यशाला’ में प्रदेश के वन, परिवहन, सहकारिता, संसदीय कार्य एवं जिले के प्रभारी मंत्री केदार कश्यप मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस उच्च स्तरीय कार्यशाला में दंतेवाड़ा के विभिन्न अंचलों से आए सैकड़ों प्रगतिशील किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों, ग्रामीण युवाओं और कृषि वैज्ञानिकों ने हिस्सा लेकर जैविक खेती की
उन्नत व वैज्ञानिक तकनीकों को बारीकी से समझा।
कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि दंतेवाड़ा की भौगोलिक और प्राकृतिक परिस्थितियां पूरी तरह से जैविक खेती के अनुकूल हैं। यहाँ के पारंपरिक किसान अपनी मेहनत और आधुनिक नवाचार के बल पर दंतेवाड़ा को पूरे देश के सामने जैविक कृषि का एक आदर्श मॉडल जिला बना सकते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि जैविक खेती केवल फसलों के उत्पादन की पद्धति नहीं है, बल्कि यह एक स्वस्थ समाज के निर्माण, सुरक्षित पर्यावरण और भावी पीढ़ी के समृद्ध भविष्य की मजबूत आधारशिला है। रासायनिक उर्वरकों (केमिकल खादों) और कीटनाशकों पर अपनी निर्भरता को कम करके किसान न केवल धरती की उपजाऊ क्षमता बचा सकते हैं, बल्कि उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद तैयार कर अपनी आय को दोगुना भी कर सकते हैं।
कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप देश भर में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई जा रही हैं, वहीं छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार कृषि को एक बेहद लाभकारी व्यवसाय बनाने के लिए चौतरफा प्रयास कर रही है। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं की आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश करते हुए स्व-सहायता समूहों द्वारा रागी (मिलेट्स) से निर्मित विभिन्न पौष्टिक उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई गई। प्रभारी मंत्री ने यहाँ विशेष रूप से तैयार किए गए ‘रागी केक’ का बारीकी से अवलोकन किया और महिलाओं के हुनर की मुक्त कंठ से सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय उपजों का यह वैल्यू एडिशन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का सबसे बड़ा जरिया बनेगा।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्थानीय विधायक चैतराम अटामी ने भी किसानों से कृषि विभाग की कल्याणकारी योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की। कार्यशाला के दौरान कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को वर्मी कम्पोस्ट तैयार करने, जैव उर्वरकों के सही उपयोग, प्राकृतिक कीट प्रबंधन और जैविक उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग व मार्केटिंग के गुर सिखाए। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों द्वारा उपस्थित कृषकों को उन्नत कृषि आदान सामग्रियां और फलों के पौधों का निःशुल्क वितरण किया गया। इस दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी सहित कई स्थानीय जनप्रतिनिधि, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और वनांचल के दूर-दराज गांवों से आए ग्रामीण बड़ी संख्या में मौजूद रहे।



