छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Railway News: अब आकाशीय बिजली से नहीं थमेगी ट्रेनों की रफ्तार, रेलवे ला रहा आधुनिक डिस्कनेक्टर असेंबली तकनीक!

मानसून में सफर होगा सुहाना: ओएचई लाइन ट्रिप होने की समस्या का रेलवे ने ढूंढा स्थाई समाधान, सभी जोन में लगेंगे आधुनिक लाइटनिंग अरेस्टर।

रायपुर: मानसून के मौसम में अक्सर आकाशीय बिजली गिरने के कारण ट्रेनों का परिचालन ठप हो जाता है, जिससे यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। रेलवे प्रशासन ने अब इस गंभीर और पुरानी समस्या का एक स्थाई तकनीकी समाधान ढूंढ निकाला है। आगामी दिनों में भारी बारिश और आसमानी बिजली गिरने के बावजूद ट्रेनों की रफ्तार पर कोई ब्रेक नहीं लगेगा। इसके लिए रेलवे एक बेहद आधुनिक और हाईटेक सिस्टम लागू करने जा रहा है, जिससे ओएचई (ओवरहेड इक्विपमेंट) लाइन ट्रिप होने और ट्रेनों के जहां-तहां ट्रैक पर खड़े हो जाने की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।

इस नई योजना के तहत भारतीय रेलवे के सभी जोन में आधुनिक डिस्कनेक्टर असेंबली प्रणाली वाले बेहद शक्तिशाली लाइटनिंग अरेस्टर लगाए जाएंगे। यह आधुनिक सिस्टम इतना एडवांस है कि बिजली गिरने पर अगर कोई लाइटनिंग अरेस्टर उपकरण खराब भी हो जाता है, तो यह प्रणाली उसे पलक झपकते ही मुख्य लाइन से अलग यानी डिस्कनेक्ट कर देती है। इस त्वरित प्रक्रिया की वजह से ओएचई लाइन ट्रिप नहीं होती और पावर सप्लाई लगातार बिना किसी रुकावट के जारी रहती है, जिससे ट्रेनों की आवाजाही पर कोई बुरा असर नहीं पड़ता है।

डिस्कनेक्टर असेंबली के साथ-साथ रेलवे थर्मोविजन तकनीक का भी बड़े पैमाने पर इस्तेमाल करने जा रहा है। इस तकनीक के जरिए रेलवे के तकनीकी कर्मचारी थर्मल कैमरे की मदद से ओएचई लाइनों और सब-स्टेशनों में होने वाली अत्यधिक हीटिंग या तकनीकी गड़बड़ी का समय रहते पता लगा सकेंगे। इन दोनों तकनीकों के इस बेहतरीन तालमेल से मानसून के दौरान भी रेल यात्रा पूरी तरह सुरक्षित और समयबद्ध हो जाएगी। रेलवे के इस सराहनीय कदम से न केवल ट्रेनों की गति बनी रहेगी, बल्कि रेल संपत्तियों को आकाशीय बिजली से होने वाले बड़े नुकसान से भी बचाया जा सकेगा।

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