छत्तीसगढ़

नकटी कांड में आधी रात तक हाईवोल्टेज ड्रामा: कलेक्ट्रेट से मंत्री बंगले तक बेघर परिवारों का हल्लाबोल; उधर 500 जवानों के पहरे में हाउसिंग बोर्ड का निर्माण शुरू

रायपुर में 80 मकान तोड़े जाने के बाद भारी तनाव; एक तरफ सड़कों पर विस्थापितों का उग्र प्रदर्शन, दूसरी तरफ विवादित जमीन पर पुलिस छावनी के बीच खींची जा रही बाउंड्रीवाल

रायपुर, 4 जुलाई 2026। नवा रायपुर के नकटी गांव में हाउसिंग बोर्ड द्वारा की गई भारी बुलडोजर कार्रवाई का मामला अब एक बड़े प्रशासनिक और राजनीतिक गतिरोध में बदल चुका है। शुक्रवार को शुरू हुआ विस्थापित परिवारों और प्रभावित ग्रामीणों का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा है, जिसके चलते राजधानी रायपुर में आधी रात तक जबरदस्त हाईवोल्टेज ड्रामा और तनाव की स्थिति बनी रही।

एक तरफ जहां अपने आशियाने उजड़ने से नाराज सैकड़ों ग्रामीण सड़कों पर उतरकर सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोले हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विवादित स्थल पर प्रशासन ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

कलेक्ट्रेट से मंत्री बंगले तक रातभर डटे रहे प्रदर्शनकारी

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शुक्रवार दोपहर को कांग्रेस नेताओं के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों का हुजूम सबसे पहले रायपुर कलेक्ट्रेट पहुंचा। वहां घंटों धरना देने और किसी बड़े अधिकारी के न आने पर प्रदर्शनकारियों का सब्र टूट गया। इसके बाद विस्थापितों ने सीधे आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी के बंगले की ओर पैदल मार्च कर दिया।

सैकड़ों की संख्या में महिलाओं और बच्चों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने मंत्री बंगले का घेराव कर दिया। मंत्री के निवास के सामने ही प्रदर्शनकारी जमीन पर बैठ गए और यह प्रदर्शन देर रात तक लगातार जारी रहा। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जब तक उन्हें रहने के लिए पक्का विकल्प या मुआवजा नहीं मिलता, वे पीछे नहीं हटेंगे।

मैदान पर भारी पुलिस पहरा: 500 जवानों के बीच बन रही बाउंड्रीवाल

सड़कों पर चल रहे इस भारी विरोध प्रदर्शन के बीच, नकटी गांव में जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिस जमीन से 80 से ज्यादा मकानों को ढहाया गया था, वहां प्रशासन ने दोबारा कब्जे की स्थिति को रोकने के लिए अपनी तैयारी पूरी कर ली है:

पुलिस छावनी में तब्दील गांव: नकटी गांव को पूरी तरह से छावनी में बदल दिया गया है। सुरक्षा के मद्देनजर वहां 500 से अधिक पुलिस जवानों और अधिकारियों की तैनाती की गई है।

घेराबंदी शुरू: भारी पुलिस बल और सुरक्षा घेरे के बीच हाउसिंग बोर्ड (आवास मंडल) ने उस विवादित जमीन पर तेजी से बाउंड्रीवाल (सीमांकन दीवार) का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है, ताकि जमीन को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।

मामला क्यों हुआ संवेदनशील?

इस कार्रवाई के समय को लेकर अब लगातार सवाल उठ रहे हैं। छत्तीसगढ़ में इस समय मूसलाधार बारिश का दौर चल रहा है। ऐसे मौसम में अचानक 80 से अधिक परिवारों के घरों को मलबे में तब्दील कर दिए जाने से विस्थापितों के सामने रहने और खाने-पीने का गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है। यही वजह है कि विपक्षी दल कांग्रेस भी इस मुद्दे को लेकर आक्रामक है और इसे सरकार के खिलाफ एक बड़ा मुद्दा बनाने में जुट गई है।

फिलहाल, कलेक्ट्रेट से लेकर मंत्री बंगले और नकटी गांव के मैदानी मोर्चे तक स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है और प्रशासन पल-पल की गतिविधि पर नजर रखे हुए है।

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