छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में सुशासन का अगला गियर: चिंतन शिविर 3.0 से तैयार हुआ विकसित छत्तीसगढ़ का रोडमैप; एआई (AI), ड्रोन और डिजिटल गवर्नेंस पर हुआ महामंथन

ई-ऑफिस और सीएम हेल्पलाइन के बाद अब उभरती तकनीकों से सुधरेगी प्रशासनिक व्यवस्था; मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा- धरातल पर उतरेंगे विशेषज्ञों के सुझाव

नवा रायपुर/रायपुर, 5 जुलाई 2026। शासन-प्रशासन को अधिक प्रभावी, आधुनिक, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने के संकल्प के साथ नवा रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) में आयोजित दो दिवसीय मंत्रिमंडल ‘चिंतन शिविर 3.0’ संपन्न हो गया है। सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा आईआईएम रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस उच्च स्तरीय शिविर में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मंत्रिपरिषद के सभी सदस्यों और देश के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण के लिए दूरदर्शी नीतियों की मजबूत आधारशिला रखी।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शिविर के निष्कर्षों की जानकारी देते हुए कहा कि चिंतन शिविर केवल चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह सरकार की कार्यसंस्कृति को आधुनिक और नागरिक-केंद्रित बनाने का एक प्रभावी माध्यम बन चुका है।

शिविर में इन 4 बड़े स्तंभों पर हुआ महामंथन

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चिंतन शिविर के दौरान देश की नामचीन हस्तियों और विशेषज्ञों ने महत्वपूर्ण सत्रों को संबोधित किया, जिसके मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

मूल्य-आधारित नेतृत्व: प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए नेतृत्व विकास, भावनात्मक संतुलन, सेवा-भाव और नैतिक दायित्वों पर अपने विचार रखे। उन्होंने संवेदनशील प्रशासन को प्रभावी सुशासन की सबसे बड़ी जरूरत बताया।

इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज (उभरती तकनीकें): नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर अभय करंदीकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5जी (5G), ड्रोन, जियोस्पेशियल टेक्नोलॉजी और ब्लॉकचेन के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि कैसे डेटा-आधारित प्रशासन से सरकारी सेवाओं को सीधे नागरिकों के मोबाइल तक पारदर्शी रूप से पहुंचाया जा सकता है।

कृषि से समृद्धि: प्रख्यात कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने छत्तीसगढ़ में प्राकृतिक खेती, जलवायु अनुकूल कृषि, फसल विविधीकरण (Crop Diversification) और कृषि को बाजार से जोड़ने के व्यावहारिक सुझाव दिए, जिससे किसानों की आय दोगुनी की जा सके।

प्रशासनिक नवाचार: मंत्रियों और वरिष्ठ आईएएस (IAS) अफसरों ने समूह बनाकर राज्य के विकास और विभागीय समन्वय को बेहतर करने के लिए मंथन किया।

पिछले शिविरों से धरातल पर उतरे ये बड़े बदलाव

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बताया कि यह सरकार की चिंतन प्रक्रिया का ही नतीजा है कि पिछले दो संस्करणों के सुझावों को सरकार ने प्रभावी ढंग से लागू किया है, जिसके उदाहरण हैं:

ई-ऑफिस प्रणाली: मंत्रालय (महानदी भवन) में पूरी तरह ई-ऑफिस लागू होने से फाइलों का निपटारा तेज और पारदर्शी हुआ है।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076: आम जनता की शिकायतों के त्वरित निवारण के लिए इस टोल-फ्री व्यवस्था की शुरुआत हुई।

सेवा सेतु पोर्टल: इस सिंगल विंडो सिस्टम के माध्यम से वर्तमान में छत्तीसगढ़ के 36 विभागों की 520 से अधिक सेवाएं नागरिकों को घर बैठे ऑनलाइन मिल रही हैं।

विकसित भारत 2047 के तर्ज पर बनेगा विकसित छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने पूर्ण विश्वास व्यक्त किया कि ‘चिंतन शिविर 3.0’ से प्राप्त अमृत वचनों और व्यावहारिक सुझावों को बहुत जल्द ठोस नीतिगत और प्रशासनिक फैसलों के रूप में छत्तीसगढ़ में लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के अनुरूप छत्तीसगढ़ को देश का अग्रणी और सबसे तकनीकी रूप से उन्नत राज्य बनाने के लिए साय सरकार नवाचार, ज्ञान और आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देती रहेगी।

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