छत्तीसगढ़

विकसित भारत 2047 के संकल्प को रफ्तार देगी सहकारिता: अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर रायपुर में हुआ महामंथन; ग्रामीण इकोनॉमी को मजबूत करने पर जोर

इन्दिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मंडपम में जुटीं सहकारिता क्षेत्र की दिग्गज हस्तियां; केंद्र सरकार के सहकारिता मंत्रालय के 5 साल पूरे होने पर प्रदेशभर में मनाया जा रहा सहकारी सप्ताह

रायपुर, 5 जुलाई 2026। देश को वर्ष 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प में सहकारिता क्षेत्र की भूमिका को रेखांकित करने के लिए राजधानी रायपुर में एक बड़ा आयोजन हुआ। अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस के मौके पर लाभांडी स्थित इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के ‘कृषि मंडपम’ में सहकारिता क्षेत्र की वर्तमान चुनौतियों, हालिया उपलब्धियों और भविष्य की असीम संभावनाओं पर केंद्रित एक विशेष पैनल चर्चा आयोजित की गई।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ अपेक्स बैंक के प्राधिकृत अधिकारी केदारनाथ गुप्ता, मार्कफेड के प्राधिकृत अधिकारी शशिकांत द्विवेदी तथा जिला सहकारी केंद्रीय बैंक अंबिकापुर के अध्यक्ष रामकिशुन सिंह ने दीप प्रज्वलित कर किया।

5 साल का हुआ सहकारिता मंत्रालय, छत्तीसगढ़ में मन रहा सहकारी सप्ताह

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उल्लेखनीय है कि देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और गृह व सहकारिता मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में भारत सरकार के ‘सहकारिता मंत्रालय’ के गठन के गौरवशाली पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस ऐतिहासिक उपलक्ष्य में पूरे छत्तीसगढ़ प्रदेश में 29 जून से 6 जुलाई 2026 तक विशेष ‘सहकारी सप्ताह’ मनाया जा रहा है। इसी कड़ी के तहत अंतरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर इस विशेष टॉक-शो और मंथन का आयोजन किया गया।

इन 5 प्रमुख एजेंडों पर विशेषज्ञों ने साझा किए विचार

पैनल चर्चा के दौरान देश और प्रदेश के नीति निर्धारकों और कृषि-सहकारिता विशेषज्ञों ने ‘विकसित भारत-2047’ के लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई व्यावहारिक सुझाव सामने रखे:

वनांचल में लघु वनोपज समितियां: छत्तीसगढ़ के आदिवासी और वनांचल क्षेत्रों में लघु वनोपज सहकारी समितियों को और अधिक हाईटेक और व्यावसायिक बनाने पर चर्चा हुई।

श्वेत क्रांति का विस्तार: ग्रामीण इलाकों में दुग्ध सहकारिता (Dairy Co-operatives) को बढ़ावा देने और इसके जरिए महिला सशक्तिकरण को नई दिशा देने की बात कही गई।

मत्स्य पालन से रोजगार: ग्रामीण युवाओं को स्थानीय स्तर पर आजीविका देने के लिए मत्स्य सहकारी समितियों के कामकाज को आधुनिक बनाने पर जोर दिया गया।

बैंकिंग ढांचे की मजबूती: नाबार्ड (NABARD), अपेक्स बैंक और जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के बीच आपसी समन्वय को बेहतर करने का रोडमैप तैयार किया गया।

पैक्स (PACS) का आधुनिकीकरण: प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों को आत्मनिर्भर और बहुउद्देशीय बनाने की रणनीतियों पर विचार हुआ।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ है सहकारिता

चर्चा में शामिल वक्ताओं ने एक सुर में कहा कि सहकारिता केवल एक विभाग नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, किसानों की आमदनी दोगुनी करने, महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और जमीनी स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करने का सबसे प्रभावी और लोकतांत्रिक माध्यम है।

इस गरिमामय कार्यक्रम में जिला सहकारी केंद्रीय बैंक रायपुर के उपाध्यक्ष अभिनेष कश्यप, राज्य सहकारी संघ के अध्यक्ष सौरभ शर्मा, अपेक्स बैंक के प्रबंध संचालक एवं अपर आयुक्त के.एन. कांडे, मत्स्य विभाग के संचालक नाग, अपर आयुक्त सावित्री भगत, उपायुक्त किरण गुप्ता, संयुक्त आयुक्त बसंत कुमार, मुकेश ध्रुव, तिग्गा, बुनकर, गौरीशंकर शर्मा, उपायुक्त युगल किशोर तथा अपेक्स बैंक के डीजीएम भूपेश चंद्रवंशी सहित सहकारिता विभाग के सभी आला अधिकारी मौजूद रहे। इनके अलावा छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से आए सहकारी शक्कर कारखानों, दुग्ध महासंघ, एनसीडीसी (NCDC) और पैक्स के सैकड़ों प्रतिनिधियों व प्रगतिशील किसानों ने हिस्सा लिया।

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