Bazar Para Art Rakhis: धान की बालियों और चावल से बन रहीं इको-फ्रेंडली राखियां; बलौदा बाजार में महिलाएं सीख रहीं पैरा आर्ट
राष्ट्रीय आजीविका मिशन और जिला प्रशासन की आत्मनिर्भर पहल; ग्राम लाहोद की गृहिणियों को मिला विशेष प्रशिक्षण, रक्षाबंधन पर दिखेगा अनूठा हुनर

24 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के बलौदा बाजार-भाटापारा जिले में ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ करने और उन्हें स्वावलंबी बनाने के उद्देश्य से जिला प्रशासन द्वारा एक नवाचारी पहल की गई है। इसके तहत बिहान (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन) के माध्यम से स्थानीय गृहिणियों को पैरा आर्ट (Straw Art) का प्रशिक्षण देकर स्वरोजगार से जोड़ा जा रहा है।
जनपद पंचायत बलौदा बाजार के अंतर्गत आने वाले ग्राम लाहोद में स्व-सहायता समूह की महिलाओं के लिए विशेष प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जहां वे छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कला को आधुनिक रूप दे रही हैं।
धान की बालियों और चावल से बन रहीं आकर्षक राखियां
आगामी रक्षाबंधन पर्व को ध्यान में रखते हुए प्रशिक्षण के दौरान महिलाएं पैरा (धान का पुआल), धान की बालियों, चावल के दानों और प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर बेहद खूबसूरत और इको-फ्रेंडली राखियां तैयार कर रही हैं।
कला और स्वरोजगार का संगम:
पैरा आर्ट के माध्यम से निर्मित ये राखियां न केवल पर्यावरण-अनुकूल हैं, बल्कि देखने में भी बेहद आकर्षक और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक समेटे हुए हैं। स्थानीय बाजार में इन राखियों की बिक्री से महिलाओं को अच्छी अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।
महिला सशक्तिकरण की ओर बढ़ते कदम
प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं महिलाओं ने बताया कि घर के कामकाज के बाद मिलने वाले खाली समय का सही उपयोग कर वे अब हुनरमंद बन रही हैं। इस पहल से उनमें आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक रूप से अपने परिवार का सहारा बनने जा रही हैं। जिला प्रशासन की ओर से निर्मित राखियों और अन्य कलाकृतियों के विक्रय के लिए सी-मार्ट और स्थानीय मेलों में बाजार उपलब्ध कराया जाएगा।



