Welfare News : ‘सशक्त बचपन, समृद्ध छत्तीसगढ़’: बच्चों के पोषण और संरक्षण में प्रदेश ने गढ़े नए आयाम; पोषण पखवाड़े में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में बाल विकास को मिली नई गति; कुपोषण और स्टंटिंग में आई भारी कमी

रायपुर, 5 अगस्त। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ में बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा और सुरक्षा के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज की गई है। राज्य में संचालित आईसीडीएस, मिशन वात्सल्य, पोषण अभियान और बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान के प्रभावी क्रियान्वयन से प्रदेश बाल कल्याण के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शुमार हो गया है। राष्ट्रीय पोषण माह और पोषण पखवाड़ा अभियानों के तहत उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ ने अप्रैल में आयोजित पोषण पखवाड़े में राष्ट्रीय स्तर पर पहला स्थान प्राप्त कर एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।
बच्चों में कुपोषण उन्मूलन के लिए राज्य सरकार द्वारा चलाए गए अभियानों के दूरगामी परिणाम सामने आ रहे हैं। पोषण ट्रैकर ऐप के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर 2023 में जहां 0-5 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों में स्टंटिंग (बौनापन) की दर 30.27 प्रतिशत थी, वह जून 2026 तक घटकर 22.45 प्रतिशत पर आ गई है। इसके साथ ही प्रदेश के 11 हजार 490 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बाल विकास केंद्रों के रूप में ढाला जा रहा है, जिनमें ‘BaLA’ (बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड) पेंटिंग, खेल आधारित शिक्षण और पोषण वाटिका जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। मानव संसाधन सुदृढ़ीकरण के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के पदों में भी उल्लेखनीय वृद्धि की गई है।
दूसरी ओर, अनाथ, परित्यक्त और विशेष संरक्षण वाले बच्चों के लिए ‘मिशन वात्सल्य’ और ‘मुख्यमंत्री बाल उदय योजना’ सुरक्षा कवच साबित हो रही हैं। राज्य में बाल देखरेख संस्थाओं की संख्या बढ़कर 109 हो गई है तथा दत्तक ग्रहण और स्पॉन्सरशिप योजनाओं से लाभान्वित बच्चों का आंकड़ा कई गुना बढ़ चुका है। वहीं, ‘बाल विवाह मुक्त छत्तीसगढ़ अभियान’ के तहत प्रशासनिक सख्ती और जागरूकता अभियानों के बल पर रोके गए बाल विवाहों की संख्या 109 से बढ़कर 888 तक पहुंच गई है। ये समग्र प्रयास राज्य में बच्चों के सुरक्षित, पोषित और सुखद भविष्य की मजबूत नींव रख रहे हैं।



