Infrastructure News : Chhattisgarh की तीन मेगा सिंचाई परियोजनाओं को मिली बड़ी कानूनी मजबूती, हाई कोर्ट ने खारिज की याचिका
पैरी-सिकासार लिंक परियोजना की निविदा प्रक्रिया को कोर्ट ने माना वैध; मटनार, मोहमेला और पैरी परियोजनाओं के निर्माण का मार्ग प्रशस्त

रायपुर, 7 अगस्त। Chhattisgarh शासन के जल संसाधन विभाग की तीन महत्वाकांक्षी सिंचाई परियोजनाओं—बस्तर की मटनार-देउरगांव बहुउद्देशीय उद्वहन बैराज परियोजना, रायपुर जिले की मोहमेला-सिरपुर बैराज परियोजना तथा गरियाबंद जिले की पैरी परियोजना (सिकासार-कोडार लिंक)—को छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के ऐतिहासिक निर्णय से बड़ी कानूनी मजबूती मिली है। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने ‘पैरी-सिकासार लिंक परियोजना’ से संबंधित याचिका (WPC 4026/2026) को निरस्त करते हुए विभाग द्वारा अपनाई गई निविदा (Tender) प्रक्रिया, पात्रता शर्तों और तकनीकी मूल्यांकन को पूरी तरह विधिसम्मत ठहराया है।
उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि ‘टेंडर इनवाइटिंग अथॉरिटी’ अपनी आवश्यकताओं की सर्वोत्तम निर्णायक होती है और अनुमानित लागत के दो गुना औसत वार्षिक टर्नओवर की पात्रता शर्त नियमों के अनुरूप है। इस पारदर्शी प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया के बाद मटनार-देउरगांव परियोजना में NCC लिमिटेड (हैदराबाद), मोहमेला-सिरपुर बैराज में ओम मेटल्स इंफ्राप्रोजेक्ट्स तथा पैरी-सिकासार लिंक परियोजना में दिलीप बिल्डकॉन की बोलियां सबसे कम (L-1) पाई गई हैं। कानूनी अड़चनें दूर होने से अब इन सभी बहुउद्देशीय परियोजनाओं के जल्द निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
इन मेगा परियोजनाओं के निर्माण से प्रदेश के कृषि और ऊर्जा क्षेत्र को बड़ी नई ताकत मिलेगी। मटनार-देउरगांव परियोजना से 16,000 हेक्टेयर कृषि भूमि को स्थायी सिंचाई और 21 मेगावॉट स्वच्छ जलविद्युत का उत्पादन होगा। वहीं, मोहमेला-सिरपुर बैराज से 1,800 हेक्टेयर तथा पैरी-सिकासार-कोडार लिंक से करीब 25,000 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल व औद्योगिक जल उपलब्ध कराया जाएगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अधिकारियों को इन सभी परियोजनाओं का काम गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध ढंग से पूरा करने के कड़े निर्देश दिए हैं।



