छत्तीसगढ़

सावधान! भिलाई में साइबर ठगी के ‘म्यूल अकाउंट’ खेल का भंडाफोड़, 13 जालसाज गिरफ्तार; लाखों के संदिग्ध ट्रांजेक्शन का खुलासा

किराये के बैंक खातों से हो रहा था ठगी की रकम का लेनदेन; दुर्ग पुलिस और ACCU की संयुक्त कार्रवाई में 10 लाख से अधिक का संदिग्ध लेन-देन उजागर

भिलाई/रायपुर, 10 अगस्त। छत्तीसगढ़ के भिलाई (दुर्ग) जिले में साइबर ठगी की काली कमाई को सफेद करने और खातों में घुमाने के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है। दुर्ग पुलिस की एसीसीयू (ACCU), सुपेला थाना और भिलाई नगर थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए ठगी की रकम को इधर-उधर ट्रांसफर करने वाले 13 शातिर ‘म्यूल’ (Mule) खाताधारकों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की प्राथमिक वित्तीय जांच में इन आरोपियों के बैंक खातों के माध्यम से 10 लाख रुपये से भी अधिक के संदिग्ध और अवैध ऑनलाइन लेन-देन का खुलासा हुआ है।

पुलिस जांच के अनुसार, गिरफ्तार किए गए आरोपी चंद पैसों के लालच में साइबर अपराधियों को अपने बैंक खाते, पासबुक, एटीएम कार्ड और सिम कार्ड उपलब्ध कराते थे। जब अंतरराज्यीय साइबर ठग किसी आम नागरिक से ऑनलाइन धोखाधड़ी करते थे, तो ठगी की रकम को सबसे पहले इन्हीं म्यूल (किराये के) खातों में मंगवाया जाता था और फिर तुरंत अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर लिया जाता था। साइबर सेल को लगातार मिल रही शिकायतों और राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) से प्राप्त इनपुट्स के आधार पर पुलिस ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से इन आरोपियों को चिन्हित कर दबोचा।

पकड़े गए आरोपियों के कब्जे से कई बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन और संदिग्ध सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। दुर्ग पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि साइबर अपराधियों के साथ-साथ उन्हें अपने खाते किराए पर देने वाले लोग भी कानूनी रूप से उतने ही दोषी हैं। पुलिस अब इन खातों के तार देश के किन-किन बड़े साइबर आपराधिक गिरोहों से जुड़े हैं, इसकी गहराई से जांच कर रही है। साथ ही पुलिस प्रशासन ने आम जनता से अपील की है कि वे किसी भी अज्ञात व्यक्ति को अपने बैंक खाते और पहचान संबंधी दस्तावेज कभी साझा न करें।

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