Culture Honors: पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय को राष्ट्रपति ने संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से किया सम्मानित: 2500 लोक गीत-गाथाओं और 175 लोकवाद्यों को सहेजा
नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों मिला सम्मान; अनूप रंजन ने पुरस्कार को बस्तर व प्रदेश के आदिवासी कलाकारों को किया समर्पित

रायपुर, 14 अगस्त 2026 : छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने वाले जाने-माने संस्कृतिकर्मी पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय (Anup Ranjan Pandey) को एक और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (Sangeet Natak Akademi Award) से सम्मानित किया। इस गरिमामयी समारोह में राष्ट्रपति ने देश के विभिन्न राज्यों से आई नामचीन सांस्कृतिक हस्तियों और कलाकारों को कला जगत में उनके अतुलनीय योगदान के लिए सम्मानित किया।
संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त करने के बाद पद्मश्री अनूप रंजन पांडेय ने अपनी इस उपलब्धि को छत्तीसगढ़ की माटी, लोक संस्कृति और विशेष रूप से बस्तर के आदिवासी कलाकारों को समर्पित किया। उन्होंने भावुक होकर कहा कि यह सम्मान उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि मात्र नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ की अनमोल लोक एवं आदिवासी सांस्कृतिक धरोहर का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान है। उन्होंने बस्तर और प्रदेश के दूरस्थ अंचलों में रहकर लोक कला को जीवित रखने वाले गुमनाम साधकों का आभार जताया।
उल्लेखनीय है कि अनूप रंजन पांडेय ने बस्तर और छत्तीसगढ़ के विभिन्न अंचलों में दशकों तक सघन शोध और संकलन का कार्य किया है। उन्होंने विलुप्त हो रही लगभग 2500 से अधिक लोक गीत-गाथाओं को लिपिबद्ध व संरक्षित किया है, साथ ही 175 से अधिक दुर्लभ लोकवाद्यों का अमूल्य संग्रह और दस्तावेजीकरण किया है। उनके निर्देशन में गठित ‘बस्तर बैंड’ ने देश-विदेश में छत्तीसगढ़िया संस्कृति का डंका बजाया है। उनकी इस उपलब्धि पर प्रदेश के कला, साहित्य और राजनीतिक जगत के दिग्गजों ने उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं।



