Supreme Court Decision: अलग ठेके की वसूली दूसरे बिल से नहीं कर सकती सरकार, 84.17 लाख रुपये ब्याज सहित लौटाने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पुराने अलग ठेके की कथित वसूली दूसरे ठेके के चालू बिल से मनमाने तरीके से नहीं की जा सकती। 84.17 लाख रुपये 6% ब्याज सहित लौटाने का आदेश।

Supreme Court Decision बिलासपुर। सुप्रीम कोर्ट ने ठेके से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि सरकार किसी पुराने और अलग ठेके में कथित अधिक भुगतान या अनियमितता की वसूली दूसरे ठेके के चालू बिल से मनमाने तरीके से नहीं कर सकती। अदालत ने कहा कि अलग-अलग अनुबंधों की देनदारियों को इस तरह आपस में समायोजित नहीं किया जा सकता।
जस्टिस पमिडीघंटम श्री नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने मेसर्स अवधेश सिंह गौतम की अपील स्वीकार करते हुए छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के 7 जनवरी 2026 के आदेश को रद्द कर दिया। मामले में सरकार की ओर से एक अलग ठेके से संबंधित कथित वसूली के लिए दूसरे ठेके के भुगतान से राशि काटी गई थी।
84.17 लाख रुपये की कटौती का मामला
मामले में 84,17,003 रुपये की राशि दूसरे ठेके के बिल से काटी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस कटौती को उचित नहीं माना और संबंधित राशि वापस करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि काटी गई राशि पर 27 सितंबर 2025 से भुगतान की तारीख तक 6 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अलग-अलग सरकारी ठेकों में भुगतान और कथित वसूली से जुड़े मामलों में अनुबंध की स्वतंत्रता और राशि काटने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति सामने आई है।
हाई कोर्ट का आदेश हुआ रद्द
इस मामले में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने 7 जनवरी 2026 को आदेश पारित किया था। इसके बाद मेसर्स अवधेश सिंह गौतम ने सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने अपील स्वीकार करते हुए हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और 84,17,003 रुपये की राशि ब्याज सहित वापस करने का निर्देश दिया।



