Health News: हृदय रोगियों के लिए उम्मीद: बीएचयू का शोध, ‘पुष्करमूलादि क्वाथ’ से दूर होगी स्टेबल एंजाइना की समस्या
आधुनिक दवाओं के साथ आयुर्वेदिक क्वाथ का सेवन दिल की सेहत के लिए बना संजीवनी; बीएचयू के आयुर्वेद संकाय के अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा

वाराणसी/रायपुर, 16 अगस्त 2026 : हृदय स्वास्थ्य और दिल से जुड़ी बीमारियों के इलाज में आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों का एक अनूठा और प्रभावकारी संगम सामने आया है। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के आयुर्वेद संकाय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक नवीनतम अध्ययन में यह बात साबित हुई है कि आयुर्वेदिक औषधि ‘पुष्करमूलादि क्वाथ’ (Pushkarmuladi Kwath) का नियमित और नियंत्रित सेवन स्टेबल एंजाइना (सीने में दर्द/हृदय रोग) के मरीजों के लिए संजीवनी का काम करता है।
शोध के अनुसार, जब इस आयुर्वेदिक क्वाथ का उपयोग एलॉपैथी या आधुनिक दवाओं के साथ एक सहायक (ऐड-ऑन) चिकित्सा के रूप में किया जाता है, तो यह मरीजों में सीने के दर्द की आवृत्ति, गंभीरता और हृदय संबंधी अन्य जटिलताओं को कम करने में अत्यधिक परिणामकारी साबित होता है। पुष्करमूल और अन्य प्राकृतिक जड़ी-बूटियों के मिश्रण से तैयार यह क्वाथ दिल की मांसपेशियों को मजबूती देने, रक्त संचार में सुधार करने तथा कोलेस्ट्रॉल व तनाव के प्रभाव को नियंत्रित करने में सहायक है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एकीकृत चिकित्सा (इंटीग्रेटेड मेडिसिन) की दिशा में बीएचयू का यह शोध हृदय रोगियों के बेहतर इलाज के लिए नई राह खोलता है। हालांकि, चिकित्सकों ने स्पष्ट किया है कि मरीजों को किसी भी आयुर्वेदिक क्वाथ या औषधि का सेवन अपने मुख्य इलाज को रोके बिना और किसी योग्य विशेषज्ञ की सलाह के बाद ही करना चाहिए।



