
Bastar Mineral Livelihood: रायपुर, 31 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में खनिज संसाधनों को जनजातीय समुदायों की आजीविका से जोड़ने की दिशा में राज्य सरकार ने एक नई डिजिटल पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (CMDC) द्वारा इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित TIN (Tribal Incentives on Natural Resources) पोर्टल का शुभारंभ किया। इसका उद्देश्य बस्तर संभाग के जनजातीय टिन संग्राहकों को उनके संग्रहित टिन अयस्क का पारदर्शी और उचित मूल्य उपलब्ध कराना है।
इस पोर्टल के जरिए टिन अयस्क की खरीदी से लेकर परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी। लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) आधारित मूल्य निर्धारण व्यवस्था के कारण बाजार की स्थिति के अनुरूप कीमत तय करने में मदद मिलेगी। वहीं डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से विक्रय की राशि सीधे हितग्राही के बैंक खाते में पहुंचेगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होने के साथ भुगतान में देरी की संभावना भी घटेगी।
डिजिटल होगी टिन खरीदी की पूरी व्यवस्था
TIN पोर्टल में डिजिटल पंजीयन और पहचान, बैंकिंग एकीकरण, QR कोड आधारित सत्यापन, स्मार्ट कार्ड, ऑनलाइन स्टॉक प्रबंधन, भुगतान की स्वचालित गणना, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और ऑडिट ट्रेल जैसी सुविधाएं शामिल की गई हैं। CMDC मुख्यालय से लेकर क्षेत्रीय कार्यालयों और क्रय केंद्रों तक रियल टाइम मॉनिटरिंग की व्यवस्था रहेगी।
हितग्राहियों को SMS अलर्ट के माध्यम से टिन बिक्री, भुगतान और लेन-देन की जानकारी मिल सकेगी। इससे टिन संग्राहकों को अपने भुगतान की स्थिति जानने के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत कम होगी।
छह केंद्रों से हो रही टिन की खरीदी
CMDC वर्तमान में बस्तर संभाग में छह टिन क्रय केंद्रों के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों से टिन अयस्क खरीद रहा है। दंतेवाड़ा जिले में बचेली, कटेकल्याण और चिकपाल, जबकि सुकमा जिले में तोंगपाल, नामा और चिंतलनार में क्रय केंद्र संचालित हैं।
अधिक से अधिक संग्राहकों को स्थानीय स्तर पर सुविधा देने के लिए बस्तर, दंतेवाड़ा और सुकमा में तीन नए टिन संग्रहण एवं क्रय केंद्र स्थापित करने की योजना है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को अपना उत्पाद बेचने के लिए लंबी दूरी तय करने की परेशानी कम होगी।
नई SOP से प्रक्रिया होगी सरल
TIN पोर्टल के साथ टिन अयस्क की खरीदी और बिक्री के लिए नई मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) भी लागू की गई है। प्रत्येक क्रय केंद्र के लिए अलग सैंपलिंग की व्यवस्था की गई है। सैंपल की संख्या 12 से घटाकर 6 कर दी गई है और प्रत्येक सैंपल का मानकीकरण 50 ग्राम किया गया है।
परीक्षण परिणाम को लेकर असहमति होने पर दोबारा विश्लेषण की व्यवस्था भी की गई है। इससे प्रक्रिया को सरल बनाने के साथ परीक्षण और विश्लेषण की लागत कम करने का प्रयास किया गया है। मासिक विश्लेषण शुल्क 14,400 रुपये से घटाकर 7,200 रुपये किया गया है। इन सुधारों से CMDC को सालाना करीब 10 लाख रुपये तक की संभावित बचत का अनुमान है।
टिन संग्राहकों को सीधे मिलेगा आर्थिक लाभ
TIN पोर्टल की सबसे अहम विशेषता LME आधारित मूल्य निर्धारण और DBT भुगतान है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिन की कीमतों में होने वाले बदलावों को ध्यान में रखते हुए मूल्य निर्धारण किया जाएगा। भुगतान सीधे बैंक खाते में पहुंचने से हितग्राहियों को किसी मध्यस्थ पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
यह व्यवस्था जनजातीय समुदायों को औपचारिक बैंकिंग प्रणाली से जोड़ने और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में भी मदद करेगी।
दो वर्षों में करोड़ों रुपये का भुगतान
CMDC द्वारा टिन अयस्क की खरीदी के माध्यम से जनजातीय हितग्राहियों को आर्थिक लाभ पहुंचाया गया है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707.2 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए करीब 90.82 लाख रुपये का भुगतान किया गया। वहीं 2025-26 में 20,895.335 किलोग्राम टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
‘मिनरल-टू-लाइवलीहुड’ मॉडल को मिलेगा बढ़ावा
बस्तर के दक्षिणी क्षेत्रों में जनजातीय समुदाय लंबे समय से टिन अयस्क का संग्रहण करते रहे हैं। अब TIN पोर्टल के माध्यम से इस पारंपरिक गतिविधि को डिजिटल व्यवस्था से जोड़कर अधिक व्यवस्थित और स्थायी आजीविका के रूप में विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
पोर्टल से सरकार और CMDC को भी टिन की खरीदी, स्टॉक, परिवहन, बिक्री, भुगतान और राजस्व की रियल टाइम जानकारी उपलब्ध होगी। इससे निगरानी और नीतिगत निर्णय लेने में आसानी होगी।
CMDC और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच समझौता
कार्यक्रम के दौरान CMDC और इंडियन ओवरसीज बैंक के बीच महत्वपूर्ण एमओयू भी किया गया। इससे वित्तीय सहयोग, पारदर्शी भुगतान और खनिज क्षेत्र में मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जाएगा।
TIN पोर्टल के जरिए सरकार का उद्देश्य बस्तर के टिन संग्राहकों को उनके प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम और पारदर्शी आर्थिक लाभ दिलाना है। डिजिटल पहचान, LME आधारित मूल्य निर्धारण, DBT, QR सत्यापन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी व्यवस्थाएं इसे खनिज संसाधनों से सीधे जनजातीय आजीविका जोड़ने वाली महत्वपूर्ण पहल बनाती हैं।



