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झीरम पर भूपेश का दोहरा चरित्र, पांच साल सत्ता में रहे तो ‘सबूत’ क्यों दबाए बैठे रहे? : शिव नारायण पाण्डेय

झीरम की पीड़ा पर राजनीति बंद करें भूपेश, प्रदेश को बताएं पांच साल में क्या किया

रायपुर, 31 अगस्त 2026। झीरम घाटी मामले को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयान पर भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिव नारायण पाण्डेय ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि झीरम घाटी जैसी गंभीर घटना को राजनीतिक मुद्दे के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। पाण्डेय ने सवाल उठाया कि जब भूपेश बघेल पांच साल तक मुख्यमंत्री रहे, तब उनके पास बताए जा रहे कथित सबूतों को सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया।

शिव नारायण पाण्डेय ने कहा कि भूपेश बघेल को प्रदेश की जनता को यह बताना चाहिए कि जिन तथ्यों और सबूतों का वे लंबे समय से दावा करते रहे, उन्हें अपने कार्यकाल के दौरान जांच के सामने क्यों नहीं रखा गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता में रहते हुए अपेक्षित परिणाम नहीं देने के बाद अब विपक्ष में रहते हुए जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

फैसले से पहले न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाने पर निशाना

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि किसी भी न्यायिक मामले में निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहियों और कानून के आधार पर होता है। फैसला आने से पहले ही जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर अविश्वास पैदा करने की कोशिश उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि भूपेश बघेल के पास कोई ऐसा तथ्य या प्रमाण है जो अब तक जांच में शामिल नहीं हुआ है, तो उसे सार्वजनिक बयानबाजी के बजाय सक्षम कानूनी मंच पर प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

झीरम को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने की अपील

पाण्डेय ने कहा कि झीरम घाटी की घटना छत्तीसगढ़ के लिए बेहद गंभीर और पीड़ादायक त्रासदी है। इसमें कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और सुरक्षाकर्मियों की जान गई थी। ऐसे मामले को बार-बार राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाने के बजाय पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि भाजपा झीरम मामले में सच्चाई सामने आने और दोषियों को कानून के कठघरे तक पहुंचाने के पक्ष में है। लेकिन राजनीतिक आरोपों के जरिए भ्रम की स्थिति पैदा करना उचित नहीं है।

पांच साल के कार्यकाल का हिसाब मांगते हुए सवाल

शिव नारायण पाण्डेय ने भूपेश बघेल से सवाल किया कि यदि उनके पास झीरम मामले से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य और सबूत थे, तो मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने उन्हें जांच के सामने क्यों नहीं रखा। उन्होंने कहा कि सत्ता में रहते चुप्पी और सत्ता से बाहर आने के बाद जांच पर सवाल उठाना जनता के सामने कई सवाल खड़े करता है।

पाण्डेय ने कहा कि झीरम पर राजनीति करने के बजाय सच्चाई और न्याय की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। उन्होंने भूपेश बघेल से अपने पांच साल के कार्यकाल के दौरान मामले में की गई कार्रवाई का जवाब देने की मांग की।

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