Forest Governance News: बजट व्यय नहीं, धरातल पर दिखने वाले परिणाम बनेंगे विभागीय सफलता का आधार : वनमंत्री केदार कश्यप
वन संरक्षण, कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं

Forest Governance News रायपुर, 7 सितंबर 2026। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि वन विभाग की सफलता केवल बजट खर्च करने से नहीं, बल्कि वन संरक्षण, कार्यों की गुणवत्ता, पारदर्शिता, सामुदायिक भागीदारी और धरातल पर दिखाई देने वाले परिणामों से तय होगी। विभागीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को टीम भावना और जिम्मेदारी के साथ काम करने तथा नियमित और साप्ताहिक समीक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।
मंत्री ने कहा कि वर्तमान वित्तीय वर्ष में कई वनमंडलों ने बजट व्यय के क्षेत्र में अच्छा प्रदर्शन किया है, लेकिन अब खर्च के साथ उससे हासिल परिणामों का भी आकलन किया जाएगा। भविष्य में बजट व्यय को अधिकारियों के वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन से जोड़ने की बात भी कही गई। उन्होंने स्पष्ट किया कि राशि खर्च करना अपने आप में उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह देखना जरूरी है कि उससे वन संरक्षण, पौधरोपण, वनवासियों की आजीविका और विभागीय योजनाओं में कितने ठोस परिणाम हासिल हुए।
वनाश्रित समुदायों को वनोपज का उचित मूल्य दिलाने पर जोर
केदार कश्यप ने कहा कि वन प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है। वनाश्रित परिवारों को उनकी वनोपज का उचित और वास्तविक मूल्य दिलाना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारियों में शामिल है। उन्होंने अधिकारियों को अधिक से अधिक फील्ड विजिट करने के निर्देश दिए, ताकि जमीनी स्तर पर योजनाओं की स्थिति, कार्यों की गुणवत्ता और लोगों की समस्याओं की जानकारी सीधे मिल सके।
विभागीय और निविदा के माध्यम से होने वाले कार्यों की गुणवत्ता पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी स्तर पर गुणवत्ता से समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। केवल सामग्री की खरीद पर ध्यान देने के बजाय उसके उपयोग और कार्य के वास्तविक परिणामों का भी मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता जरूरी
वन मंत्री ने विभागीय खरीद प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप और पारदर्शी बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बाजार दर की तुलना में अत्यधिक कम कीमत पर खरीदी जा रही सामग्री की गुणवत्ता की गंभीरता से जांच की जाए। वित्तीय समायोजन अथवा किसी भी तरह की अनियमित प्रक्रिया को रोकते हुए निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
अवैध कटाई की सूचना समय रहते विभाग तक पहुंचे
वन संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए मंत्री ने अवैध वृक्ष कटाई पर तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जंगल एक दिन में खत्म नहीं होता, इसलिए विभाग का सूचना तंत्र इतना प्रभावी होना चाहिए कि किसी भी अवैध गतिविधि की जानकारी समय रहते विभाग तक पहुंचे।
अवैध कटाई की सूचना मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई करने के साथ ही अधिकारियों को तकनीकी और प्रशासनिक स्वीकृतियां निर्धारित समयसीमा में जारी करने के निर्देश दिए गए, ताकि संरक्षण और विकास से जुड़े कार्यों में अनावश्यक देरी न हो।
प्रकृति के अनुरूप विकसित होगा ईको-टूरिज्म
मंत्री ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में परिस्थितियां सामान्य होने के साथ बढ़ी ईको-टूरिज्म की संभावनाओं का उपयोग प्रकृति और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए करने की बात कही। पर्यटन स्थलों पर प्लास्टिक के इस्तेमाल को हतोत्साहित करने तथा सीमेंट-कंक्रीट की संरचनाओं को न्यूनतम रखने के निर्देश दिए गए, ताकि प्राकृतिक स्वरूप सुरक्षित रहे।
अचानकमार और इंद्रावती में सफारी की तैयारी
वन्यजीव संरक्षण की समीक्षा के दौरान अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के निर्देश दिए गए। अचानकमार टाइगर रिजर्व (ATR) और इंद्रावती टाइगर रिजर्व (ITR) में पर्यटन गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए सफारी संचालन शुरू करने की दिशा में आवश्यक कार्यवाही करने को कहा गया।
इसके साथ ही कांकेर क्षेत्र में भालुओं के सुरक्षित पुनर्वास और रिलोकेशन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने तथा वन्यजीवों के त्वरित रेस्क्यू के लिए सभी जिलों में जरूरी Animal Rescue Equipment उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
मंत्री ने कहा कि वन और वन्यजीव प्रदेश की अमूल्य प्राकृतिक धरोहर हैं। इनके संरक्षण के साथ वनवासियों की आजीविका, विभागीय सुशासन और कार्यों की गुणवत्ता को प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए, जिसके परिणाम आम लोगों को स्पष्ट रूप से धरातल पर दिखाई दें।



