UCC Consultation News: समान नागरिक संहिता पर दो दिवसीय मंथन, आदिवासी परंपराओं से लैंगिक समानता तक आए सुझाव
छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता पर दो दिवसीय परामर्श बैठक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, लिव-इन संबंध और आदिवासी परंपराओं सहित कई मुद्दों पर सुझाव लिए गए।

UCC Consultation News रायपुर, 11 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) के संभावित क्रियान्वयन से पहले राज्य स्तर पर गठित उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न सामाजिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों और आयोगों के प्रतिनिधियों के साथ दो दिवसीय परामर्श बैठक आयोजित की। 10 सितंबर से शुरू हुई इस बैठक में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, भरण-पोषण और लिव-इन संबंध जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। राज्य में UCC को लेकर जनपरामर्श की प्रक्रिया के तहत अलग-अलग सामाजिक और संस्थागत समूहों से सुझाव लिए जा रहे हैं।
आदिवासी परंपराओं और अधिकारों पर जोर
पुराने सर्किट हाउस के सभाकक्ष में आयोजित बैठक की अध्यक्षता समिति के सदस्य एवं पूर्व वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एम.के. राउत ने की। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन पवार भी मौजूद रहे। बैठक में प्रस्तुतीकरण के माध्यम से UCC से जुड़े मौजूदा नियमों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई।
गोंडी धर्म संस्कृति संरक्षण समिति के प्रांतीय सचिव गजानंद नुरूटी ने आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्थाओं और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान का मुद्दा उठाते हुए आदिवासी समुदाय को UCC के दायरे से अलग रखने का अनुरोध किया। उनका कहना था कि कानून बनाते समय आदिवासी समाज की मौलिक पहचान, परंपराओं और अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
महिलाओं को समान अधिकार देने का सुझाव
राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने लैंगिक समानता पर जोर देते हुए महिला और पुरुष को समान अधिकार देने का सुझाव रखा। उन्होंने बेटे और बेटी को संपत्ति में समान उत्तराधिकार, विवाह एवं तलाक के अनिवार्य पंजीयन तथा संपत्ति और वसीयत से जुड़े स्पष्ट कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता बताई।
ईसाई समाज के प्रतिनिधि राजेश जॉन पाल सहित अन्य प्रतिनिधियों ने विवाह की धार्मिक मान्यताओं और लिव-इन संबंधों से जुड़े अपने विचार समिति के सामने रखे। वहीं राज्य बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बच्चों के अधिकारों और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर सुझाव दिए।
कानून को स्पष्ट और पारदर्शी बनाने पर जोर
बैठक में अधिवक्ता संघ और अधिवक्ता परिषद से जुड़े प्रतिनिधियों ने UCC के प्रावधानों को अधिक स्पष्ट, प्रभावी और पारदर्शी बनाने पर अपने विचार रखे। कान्यकुब्ज ब्राह्मण समाज के प्रतिनिधियों और मेडिकल एसोसिएशन से जुड़े चिकित्सकों ने भी UCC के संभावित क्रियान्वयन को लेकर सुझाव प्रस्तुत किए।
समिति के सदस्यों ने विभिन्न वर्गों से प्राप्त सुझावों को गंभीरता से सुना। समिति की ओर से कहा गया कि प्राप्त व्यावहारिक तथ्यों और सुझावों का अध्ययन किया जाएगा और इन्हें मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में ध्यान में रखा जाएगा। उद्देश्य ऐसा प्रारूप तैयार करना है, जिसमें राज्य की सामाजिक विविधता और अलग-अलग समुदायों की चिंताओं को समुचित स्थान मिल सके



