Raipur Town Development Scheme: जमीन विवाद पर भाजपा का पलटवार, गौरीशंकर श्रीवास ने कहा- वनमंत्री और परिवार को टारगेट करना साजिश
रायपुर के कचना-लाभांडी-सड्डू नगर विकास योजना में जमीन आवंटन विवाद पर भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने कांग्रेस के आरोपों को साजिश बताया और योजना को नियमों के तहत बताया।

Raipur Town Development Scheme रायपुर। रायपुर के कचना-लाभांडी-सड्डू क्षेत्र में प्रस्तावित नगर विकास योजना में जमीन के पुनर्गठन और अंतिम भूखंडों के आवंटन को लेकर राजनीतिक विवाद सामने आया है। कांग्रेस की ओर से वन मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी जमीन को योजना में शामिल किए जाने पर लाभ पहुंचाने के आरोप लगाए गए हैं। इसके जवाब में भाजपा के वरिष्ठ नेता गौरीशंकर श्रीवास ने इन आरोपों को साजिश बताते हुए कहा कि नगर विकास योजना किसी एक व्यक्ति के लिए नहीं है, बल्कि शहरी विस्तार और नियोजित विकास की प्रक्रिया का हिस्सा है।
भाजपा ने योजना को नियमों के तहत बताया
गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि नगर विकास योजना के तहत भू-स्वामियों की जमीन का पुनर्गठन कर क्षेत्र का सुनियोजित विकास किया जाता है। उनके अनुसार सड़क, अन्य अधोसंरचना और विकसित भूखंडों की व्यवस्था इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की योजनाएं पहले भी विभिन्न प्राधिकरण क्षेत्रों में लागू की गई हैं। छत्तीसगढ़ के अलावा मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र में भी इसी प्रकार की योजनाएं संचालित होने की बात उन्होंने कही।
भाजपा नेता ने कहा कि नगर विस्तार के लिए भूखंड स्वामियों को नियोजित तरीके से अंतिम विकसित भूखंड दिए जाते हैं। उनका दावा है कि मौजूदा मामले में भी प्रक्रिया नियमों के अनुसार आगे बढ़ रही है और भू-स्वामियों के लिए समान व्यवस्था लागू है।
कांग्रेस ने मंत्री से जुड़ी जमीन को लेकर उठाए सवाल
कांग्रेस की ओर से आरोप लगाया गया है कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी से जुड़ी जमीन को नगर विकास योजना में शामिल कर लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है। आरोपों के अनुसार कचना क्षेत्र में करीब 1.33 एकड़ जमीन से संबंधित मामला योजना के दायरे में है और इसके बदले सड्डू क्षेत्र में विकसित भूखंड मिलने की बात सामने आई है।
वहीं भाजपा का कहना है कि नगर विकास योजना में जमीन का पुनर्गठन सभी संबंधित भू-स्वामियों के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत किया जाता है। पार्टी ने कहा कि किसी एक परिवार को अलग से लाभ दिए जाने का आरोप तभी स्थापित हो सकता है, जब इसके समर्थन में दस्तावेजी प्रमाण सामने हों।
विकसित भूखंड और समान नियमों पर सवाल
नगर विकास योजनाओं में मूल भू-स्वामियों की जमीन का पुनर्गठन कर एक हिस्सा विकसित अंतिम भूखंड के रूप में वापस दिए जाने तथा शेष क्षेत्र का उपयोग सड़क और अन्य सार्वजनिक अधोसंरचना के लिए किए जाने की व्यवस्था बताई गई है। मौजूदा मामले में भी करीब 40 प्रतिशत क्षेत्रफल का अंतिम विकसित भूखंड मिलने की बात सामने आई है।
ऐसे में विवाद का प्रमुख सवाल यह है कि क्या मंत्री की पत्नी से जुड़ी जमीन पर भी वही नियम और फार्मूला लागू किया गया है, जो अन्य भू-स्वामियों पर लागू है। यदि सभी भू-स्वामियों को समान आधार पर भूखंड आवंटित किए गए हैं तो मामले को योजना की प्रक्रिया और पारदर्शिता के आधार पर देखा जा सकता है। वहीं किसी विशेष रियायत या अलग प्रक्रिया का दस्तावेजी प्रमाण सामने आने पर यह जांच का विषय हो सकता है।
भाजपा ने आदिवासी परिवार को टारगेट करने का लगाया आरोप
गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि एक परिवार और खासतौर पर गरीब आदिवासी परिवार को इस मामले में टारगेट करना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि नगर विकास योजना केंद्र सरकार की 2024-25 की प्लानिंग का हिस्सा है और पहले भी विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रकार की बसाहट एवं शहरी विस्तार की योजनाएं लागू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि गुजरात, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और ओडिशा सहित अन्य राज्यों में भी इसी तरह के मॉडल के तहत शहरी विस्तार की योजनाएं संचालित की गई हैं। भाजपा ने मौजूदा मामले में लगाए जा रहे आरोपों को गलत बताते हुए पूरे विवाद को योजना की निर्धारित प्रक्रिया और दस्तावेजों के आधार पर देखने की बात कही है।


