Raipur Town Planning News: कचना की जमीन के बदले कचना में ही प्लॉट, सड्डू में आवंटन के दावे पर उठे सवाल
कचना-लाभांडी-सड्डू नगर विकास योजना में जमीन आवंटन को लेकर सामने आए तथ्यों में कचना की जमीन के बदले कचना में ही प्लॉट और 45 मीटर सड़क पर 37 भूखंडों की जानकारी सामने आई।

Raipur Town Planning News रायपुर। कचना-लाभांडी-सड्डू नगर विकास योजना में जमीन आवंटन को लेकर उठ रहे सवालों के बीच उपलब्ध तथ्यों से तस्वीर कुछ अलग सामने आती है। जानकारी के अनुसार ग्राम कचना की मूल भूमि के बदले प्रस्तावित भूखंड कचना में ही दिया गया है, सड्डू में नहीं। योजना में किसी एक भूमि स्वामी के लिए अलग व्यवस्था किए जाने के बजाय प्रभावित भूमि स्वामियों के लिए निर्धारित नीति और प्लानिंग मानकों के आधार पर भूखंड प्रस्तावित किए गए हैं।
नगर विकास योजना का प्रारंभिक नोटिफिकेशन 5 दिसंबर 2025 को जारी हुआ था। इसके बाद 11 सितंबर 2026 को योजना का प्रारूप नक्शा प्रकाशित किया गया। उपलब्ध प्रारूप के अनुसार मूल भूमि के बदले प्रस्तावित भूखंड संबंधित ग्राम में ही रखे गए हैं। ऐसे में कचना की जमीन के बदले ग्राम परिवर्तन कर सड्डू में भूखंड दिए जाने का दावा उपलब्ध योजना से मेल नहीं खाता।
45 मीटर सड़क पर कुल 37 भूखंड
जिस भूखंड को 45 मीटर चौड़ी सड़क से जोड़कर विशेष लाभ दिए जाने का सवाल उठाया जा रहा है, वहां भी उपलब्ध जानकारी महत्वपूर्ण है। 45 मीटर चौड़े मार्ग पर कुल 37 भूखंड प्रस्तावित/आवंटित बताए गए हैं। प्लानिंग के निर्धारित मानकों के अनुसार बड़े भूखंडों को चौड़े मार्ग से जोड़ा गया है। इसी आधार पर संबंधित प्लॉट नंबर 25 को भी 45 मीटर मार्ग से जोड़ा गया है।
इसलिए केवल एक भूखंड की सड़क की चौड़ाई को अलग से देखने के बजाय उसी मार्ग पर मौजूद अन्य भूखंडों, उनके क्षेत्रफल, मूल भूमि और लागू प्लानिंग मानकों की तुलनात्मक जांच करना जरूरी होगा।
658/2 के अलावा अन्य खसरों में भी ऐसी स्थिति
मामले में खसरा नंबर 658/2 जैसी स्थिति केवल एक भूखंड तक सीमित नहीं बताई जा रही है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक खसरा नंबर 684/1, 684/5 और 681/1 की मूल भूमि के बदले भी क्रमशः प्लॉट नंबर 26 और 37 प्रस्तावित किए गए हैं। इन मामलों में मूल भूमि और प्रस्तावित भूखंड के बीच की दूरी और अधिक बताई गई है।
ऐसे में किसी एक भूखंड की मूल जमीन और प्रस्तावित प्लॉट के बीच की दूरी को विशेष लाभ का आधार मानने से पहले समान प्रकृति के दूसरे मामलों की भी तुलना करना जरूरी है।
मूल जमीनों का इस्तेमाल सार्वजनिक सुविधाओं के लिए
नगर विकास योजना में भूमि पुनर्गठन केवल भूखंड आवंटन तक सीमित नहीं है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार मूल जमीनों के कुछ हिस्सों का इस्तेमाल अमेनिटी, सड़क और STP जैसी सार्वजनिक सुविधाओं के लिए भी प्रस्तावित किया गया है।
उदाहरण के तौर पर प्लॉट नंबर 26 से संबंधित मूल भूखंड पर STP का प्रावधान बताया गया है, जबकि प्लॉट नंबर 30 से संबंधित मूल भूखंड पर सड़क और अमेनिटी के लिए भूमि निर्धारित की गई है। इसी तरह योजना की आवश्यकताओं के अनुसार अन्य मूल भूखंडों का भी सार्वजनिक उपयोग निर्धारित किया गया है।
सभी भूमि स्वामियों के लिए समान नीति का दावा
उपलब्ध जानकारी का प्रमुख पक्ष यह है कि भूखंड निर्धारण किसी एक व्यक्ति के लिए अलग नियम बनाकर नहीं, बल्कि सभी प्रभावित किसानों और भूमि स्वामियों के लिए समान नीति एवं निर्धारित प्लानिंग मानकों के आधार पर किए जाने की बात कही गई है।
इसका वस्तुनिष्ठ परीक्षण भी किया जा सकता है। संबंधित भूखंड की तुलना योजना के अन्य भूखंडों से करते हुए मूल खसरे का क्षेत्रफल, प्रस्तावित भूखंड का क्षेत्रफल, मूल जमीन से दूरी, सड़क की चौड़ाई, सार्वजनिक उपयोग और ग्राम की स्थिति जैसे बिंदुओं को सामने रखा जा सकता है। इससे यह स्पष्ट करने में मदद मिलेगी कि किसी भूमि स्वामी को नियमों से अलग कोई विशेष लाभ मिला या सभी मामलों में समान मापदंड अपनाए गए।
पूरे प्लान की तुलना से स्पष्ट होगी तस्वीर
उपलब्ध तथ्यों के अनुसार कचना की भूमि के बदले कचना में ही भूखंड प्रस्तावित है, सड्डू में नहीं। वहीं 45 मीटर सड़क पर केवल एक भूखंड नहीं, बल्कि कुल 37 भूखंड बताए गए हैं। खसरा 658/2 के अलावा 684/1, 684/5 और 681/1 जैसे मामलों में भी मूल भूमि से अलग स्थान पर भूखंड प्रस्तावित किए जाने की जानकारी सामने आई है।
ऐसे में किसी एक भूखंड को अलग करके विशेष लाभ या अनियमितता का निष्कर्ष निकालने के बजाय पूरे नगर विकास योजना के नक्शे, समान प्रकृति के आवंटनों और लागू प्लानिंग मानकों की तुलनात्मक जांच से ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकती है।



