छत्तीसगढ़

Rajyotsav 2026 Awards : राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को मिला प्रथम पुरस्कार, ‘बदलता बस्तर’ की थीम रही मुख्य आकर्षण

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदान किया पुरस्कार। वन्यजीव संरक्षण, पर्यटन और आजीविका की पहलों को मिली विशेष सराहना।

Rajyotsav 2026 Awards रायपुर, 4 नवंबर 2026। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की 26वीं वर्षगांठ पर नवा रायपुर में आयोजित राज्योत्सव 2026 में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की प्रदर्शनी को विभागीय प्रदर्शनियों की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। राज्योत्सव के समापन एवं राज्य अलंकरण समारोह में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। विभाग की ओर से अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ और प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडेय ने यह पुरस्कार ग्रहण किया। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस शानदार उपलब्धि पर विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों और वन धन केंद्रों से जुड़े सभी सदस्यों को हार्दिक बधाई दी है।

​वन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में ‘बदलता बस्तर-संवरता छत्तीसगढ़’ थीम पर तैयार इस भव्य प्रदर्शनी में बस्तर में शांति के साथ बढ़ रहे पर्यटन, आजीविका के नए अवसरों और प्रदेश में वन एवं वन्यजीव संरक्षण के अनूठे प्रयासों को बेहद आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया गया था। प्रदर्शनी के प्रवेश द्वार पर जगदलपुर की जनजातीय गौरव वाटिका, बीजापुर के इंद्रावती टाइगर रिजर्व के चेंदरू गेट और दंतेवाड़ा के वन मंदिर के प्रतिरूपों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

​‘बदलता बस्तर’ और डिजिटल नवाचारों की झलक

​प्रदर्शनी के ‘बदलता बस्तर’ खंड में सुकमा के तुंगल डैम स्थित ‘तुंगल कैफे’ की पहल मुख्य आकर्षण रही, जिसका संचालन मुख्यधारा में लौट चुकी पूर्व महिला नक्सली कर रही हैं। इसके अलावा कांगेर घाटी के समीप धुड़मारास गांव के होमस्टे (जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यटन संगठन के ‘बेस्ट टूरिज्म विलेजेस अपग्रेड प्रोग्राम’ में शामिल किया गया है) और कोंडागांव की पुष्पाल घाटी के इको-कॉटेज को भी प्रदर्शित किया गया। डिजिटल तकनीक के तहत क्यूआर कोड आधारित वन्यजीव प्रश्नोत्तरी, 360 डिग्री वर्चुअल रियलिटी और ‘गज संकेत’ ऐप ने युवाओं को विशेष रूप से आकर्षित किया।

​वन्यजीव संरक्षण और वन उत्पादों का प्रदर्शन

​’संवरता छत्तीसगढ़’ खंड में बिलासपुर के कोपरा जलाशय को रामसर स्थल का दर्जा मिलने, बारनवापारा अभयारण्य में काले हिरणों के रिलोकेशन और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत रिकॉर्ड वृक्षारोपण की सफलताओं को दर्शाया गया। साथ ही ‘छत्तीसगढ़ हर्बल्स’ और संयुक्त वन प्रबंधन के स्टॉल पर बांस की कलाकृतियों और वन धन केंद्रों में तैयार उत्पादों की भी धूम रही।

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