Bastar Dussehra 2026: बस्तर दशहरा में पूरी हुई नार फोड़नी रस्म, आठ पहियों वाले विशाल रथ को अंतिम रूप देने की तैयारी तेज
बस्तर दशहरा 2026 में जगदलपुर के सिरहासार भवन के सामने नार फोड़नी की रस्म पूरी हुई। अब आठ पहियों वाले दो मंजिला विजय रथ को अंतिम रूप देने की तैयारी तेज हो गई है।

Bastar Dussehra 2026 जगदलपुर। विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा की पारंपरिक रस्मों के बीच शनिवार को सिरहासार भवन के सामने विशाल विजय रथ निर्माण के अंतर्गत नार फोड़नी की रस्म विधि-विधान और श्रद्धा के साथ पूरी की गई। बस्तर दशहरा की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल इस रस्म के संपन्न होने के बाद अब आठ पहियों वाले दो मंजिला विशाल रथ को अंतिम रूप देने की तैयारियां तेज हो गई हैं। यह अनुष्ठान रथ के लकड़ी के पहियों को मजबूत बनाने और उन्हें सुचारू रूप से चलने योग्य बनाने की प्रक्रिया का अहम पड़ाव माना जाता है।
क्या है नार फोड़नी की परंपरा?
बस्तर दशहरा में नार फोड़नी की रस्म का विशेष महत्व है। इसके तहत पारंपरिक कारीगर रथ के लकड़ी के पहियों के केंद्र में छेद करने से पहले विधिवत पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार छेद में लोहे का विशेष गुर्दा लगाया जाता है। यह धातु का हिस्सा विशाल पहियों को मजबूती देता है, जिससे वे रथ की परिक्रमा के दौरान पड़ने वाले भारी दबाव को सह सकें और लंबे समय तक सुचारू रूप से घूमते रहें।
लोक आस्था और पारंपरिक काष्ठ कला का प्रतीक है रथ
बस्तर दशहरा में विजय रथ केवल लकड़ी से बना एक ढांचा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की लोक आस्था, पारंपरिक काष्ठ कला और सामुदायिक सहभागिता का जीवंत प्रतीक है। रथ निर्माण में पारंपरिक कारीगरों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। पीढ़ियों से चली आ रही निर्माण प्रक्रिया में धार्मिक अनुष्ठानों और तकनीकी कौशल का अनूठा मेल देखने को मिलता है।
नार फोड़नी के बाद रथ निर्माण को मिलेगी गति
नार फोड़नी की रस्म पूरी होने के बाद अब विशाल आठ पहियों वाले दो मंजिला रथ को अंतिम रूप देने का काम तेज किया जा रहा है। बस्तर दशहरा की विशिष्ट परंपराएं इसे देश के अन्य दशहरा आयोजनों से अलग पहचान देती हैं। इस उत्सव में धार्मिक आस्था के साथ बस्तर की सांस्कृतिक विरासत, सामूहिक परिश्रम और पारंपरिक शिल्पकला की झलक भी देखने को मिलती है।



