Bastar Dussehra 2026: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और सीएम विष्णु देव साय की मौजूदगी में ऐतिहासिक बना बस्तर दशहरा, मांझियों और चालकियों का मानदेय बढ़ाने का ऐलान
राष्ट्रपति मुर्मु ने बस्तर दशहरा को सामाजिक समरसता और सामूहिक आस्था का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने मांझियों का मासिक मानदेय 5,000 और चालकियों का 3,500 रुपये करने की घोषणा की।

Bastar Dussehra 2026: जगदलपुर में बस्तर की आराध्य देवी माँ दंतेश्वरी की पावन भूमि पर आयोजित विश्वप्रसिद्ध बस्तर दशहरा उत्सव में देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। इस अवसर पर राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। राष्ट्रपति मुर्मु ने लगभग 75 दिनों तक चलने वाले इस अनूठे उत्सव की प्रशंसा करते हुए इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक गौरव, सामाजिक समरसता और जनजातीय विरासत का जीवंत प्रतीक बताया।
मुरिया दरबार और लोकतांत्रिक परंपराओं की सराहना
राष्ट्रपति ने ऐतिहासिक ‘मुरिया दरबार’ की परंपरा को जमीनी स्तर पर लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस मंच पर समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधि एक साथ बैठकर जनसमस्याओं और सामाजिक विषयों पर विचार-विमर्श करते हैं। राष्ट्रपति ने बस्तर ओलंपिक और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि इनसे जनजातीय युवाओं की प्रतिभाओं को एक नया मंच मिल रहा है। साथ ही, उन्होंने नक्सलवाद से मुक्ति पाकर बस्तर के विकास पथ पर तेजी से आगे बढ़ने की बात कही।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी घोषणाएं
समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि इस वर्ष बस्तर दशहरा इसलिए भी विशेष है क्योंकि बस्तर अब हिंसक माओवाद से मुक्त होकर नवनिर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्षेत्र के विकास के लिए ‘नियद नेल्लानार योजना’, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, रायपुर-रावघाट रेल सेवा और रायपुर-विशाखापट्टनम एक्सप्रेसवे जैसी पहलों का जिक्र किया गया।
पारंपरिक प्रतिनिधियों के सम्मान और उनके आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि:
मांझियों का मासिक मानदेय: 2,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये कर दिया गया है।
चालकियों का मासिक मानदेय: 1,500 रुपये से बढ़ाकर 3,500 रुपये कर दिया गया है।
संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल और अन्य जनप्रतिनिधियों की उपस्थिति में हुए इस आयोजन ने बस्तर की सांस्कृतिक और पारंपरिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर एक बार फिर गौरवान्वित किया है।



