Bastar Organic Products: बस्तर के वनोपज को मिला जैविक प्रमाणन, ‘दण्डक ब्रांड’ से महिलाओं के उत्पादों को मिलेगी नई पहचान
दंतेवाड़ा की मां दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी को वनोपज के लिए एनपीओपी जैविक प्रमाणन मिला। दण्डक ब्रांड से कोदो, कुटकी, महुआ, इमली समेत स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की तैयारी।

Bastar Organic Products 11 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। दंतेवाड़ा जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत गठित मां दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड को वनोपज के लिए राष्ट्रीय जैविक उत्पादन कार्यक्रम (एनपीओपी) के तहत जैविक प्रमाणपत्र मिला है। इसके साथ ही यह प्रदेश में बिहान मिशन के अंतर्गत गठित वनोपज के लिए जैविक प्रमाणन प्राप्त करने वाली पहली महिला किसान उत्पादक कंपनी बन गई है। इस उपलब्धि से बस्तर के प्राकृतिक वनोपज को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री विजय शर्मा ने इस उपलब्धि पर कंपनी से जुड़ी महिलाओं और बिहान मिशन की टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार स्थानीय संसाधनों, प्रतिभा और जनभागीदारी के आधार पर बस्तर के समग्र विकास को आगे बढ़ा रही है। इसमें महिला सशक्तिकरण, ग्रामीण आजीविका और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग प्रमुख हैं।
जैविक प्रमाणन से वनोपज को मिलेगा बड़ा बाजार
विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर की महिलाएं पीढ़ियों से वनोपज के संग्रहण और संरक्षण का काम करती आ रही हैं। जैविक प्रमाणन मिलने से उनके पारंपरिक ज्ञान और मेहनत को औपचारिक पहचान मिलेगी। इससे दंतेवाड़ा के प्रमाणित जैविक वनोपज को देश के बड़े बाजारों के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने का रास्ता मजबूत होगा। साथ ही, संग्राहकों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा कि जैविक प्रमाणन केवल उत्पादों की गुणवत्ता की पहचान नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की सामूहिक उद्यमशीलता को आगे बढ़ाने का माध्यम भी है। वनोपज के प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, विपणन और निर्यात से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने पर स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे युवाओं को अपने गांव और क्षेत्र में ही आजीविका के साधन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
उप मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार की मंशा है कि बस्तर के उन गांवों के कृषि उत्पादों और वनोपज को निर्धारित मानकों के अनुसार जैविक प्रमाणन से जोड़ा जाए, जहां परंपरागत रूप से रासायनिक उर्वरकों और रसायनों का उपयोग नहीं किया जाता रहा है। इससे स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान और बेहतर बाजार मिल सकेगा। उन्होंने ‘दण्डक ब्रांड’ को बस्तर की महिलाओं, जैव विविधता और पारंपरिक उत्पादों को एक साझा पहचान देने वाली पहल बताया।
1080 महिला शेयरधारक और 60 उत्पादक समूह जुड़े
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के अंतर्गत वर्ष 2023 में गठित मां दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी ग्रामीण महिलाओं को संगठित कर उनकी आजीविका बढ़ाने का काम कर रही है। वर्तमान में कंपनी से 1,080 महिला शेयरधारक प्रत्यक्ष रूप से जुड़ी हैं। इसके अलावा जिले के 60 उत्पादक समूहों से संबंधित 2,100 वनोपज संग्राहक महिलाएं भी कंपनी की गतिविधियों से लाभान्वित हो रही हैं।
ये महिलाएं स्थानीय स्तर पर वनोपज के संग्रहण और विपणन से जुड़ी हैं। कंपनी के माध्यम से उन्हें संगठित बाजार व्यवस्था, उत्पादों के मूल्य संवर्धन और बेहतर कीमत प्राप्त करने के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कंपनी ने पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया है। पिछले वर्ष लगभग 54 लाख रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई थी, जबकि चालू वर्ष में अब तक 50 लाख रुपये से अधिक के वनोपज की खरीदी की जा चुकी है। एनपीओपी प्रमाणन के बाद उत्पादों के बेहतर मूल्य पर विपणन की उम्मीद है। कंपनी अब खरीदी-बिक्री के साथ प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और आकर्षक पैकेजिंग के जरिए भी अपने कारोबार का विस्तार कर रही है।
‘दण्डक ब्रांड’ के तहत मिलेंगे बस्तर के पारंपरिक उत्पाद
स्थानीय उत्पादों को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए मां दंतेश्वरी महिला किसान उत्पादक कंपनी ने ‘दण्डक ब्रांड’ की शुरुआत की है। इसी क्रम में दंतेवाड़ा में कंपनी के विशेष बिक्री केंद्र का शुभारंभ किया गया है। इस केंद्र पर स्थानीय स्तर पर उत्पादित और संग्रहित विभिन्न खाद्य पदार्थों तथा वनोपज को एक ही स्थान पर उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
दण्डक ब्रांड के उत्पादों को राज्य और देश के विभिन्न बाजारों के साथ विदेशों में भी छत्तीसगढ़ के ‘छत्तीसकला’ ब्रांड के अंतर्गत बेचने की योजना है। इसके तहत नीम फूल, एचएमटी चावल, लाल चूड़ी चावल, बासमती चावल, अमचूर, इमली, महुआ, कोदो, कुटकी और रागी सहित कई स्थानीय उत्पाद बाजार में उतारे गए हैं।
इन उत्पादों का मूल्य संवर्धन कर आकर्षक पैकेजिंग के साथ बिक्री की व्यवस्था विकसित की जा रही है। इससे बस्तर के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिलने और ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ने की उम्मीद है।
एनपीओपी प्रमाणन से निर्धारित मानकों पर खरे उतरने वाले उत्पादों को प्रमाणित जैविक उत्पाद के रूप में बाजार में बेचने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग से निर्यात की संभावनाएं भी तलाशने की योजना है।
स्थानीय बाजार से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचने की उम्मीद
दंतेवाड़ा जिले के कुआकोंडा विकासखंड के नेलेवाड़ा गांव की निवासी और कंपनी की अध्यक्ष विमला ठाकुर ने इस उपलब्धि पर खुशी जताई। उन्होंने बताया कि पहले महिलाओं द्वारा संग्रहित वनोपज की बिक्री मुख्य रूप से स्थानीय बाजारों में होती थी। इसके कारण कई बार उत्पादों का अपेक्षित मूल्य नहीं मिल पाता था।
विमला ठाकुर ने कहा कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से दण्डक ब्रांड की शुरुआत और अब एनपीओपी प्रमाणन मिलने से कंपनी से जुड़ी महिलाओं में नया उत्साह है। उन्हें उम्मीद है कि अब उनके वनोपज को बेहतर कीमत मिलेगी और उत्पाद राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच सकेंगे। इससे महिलाओं की आमदनी बढ़ने के साथ उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा बढ़ावा
दंतेवाड़ा कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव के नेतृत्व में जिला प्रशासन की यह पहल कंपनी से जुड़ी 1,080 महिला शेयरधारकों और 60 उत्पादक समूहों की 2,100 वनोपज संग्राहक महिलाओं के लिए आर्थिक अवसरों का विस्तार कर सकती है।
जैविक प्रमाणन, स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन, दण्डक ब्रांड के माध्यम से विपणन और बड़े बाजारों से जुड़ाव के जरिए महिलाओं की आय बढ़ाने की संभावनाएं हैं। इससे बस्तर के पारंपरिक वनोपज को व्यापक पहचान मिलने के साथ स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।



