छत्तीसगढ़

भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार: रायगढ़ में बिहान की दीदियों ने तैयार कीं अनोखी ‘बीज राखियां’

त्योहार के बाद मिट्टी में मिलकर अंकुरित होंगे देसी बीज; 7 विकासखंडों में सर्वश्रेष्ठ राखी बनाने वाली दीदियां कलेक्टर को बांधेंगी राखी

रायपुर। रक्षाबंधन का पावन पर्व इस बार केवल भाई-बहन के अटूट प्रेम तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे प्रकृति और पर्यावरण के संरक्षण का एक बड़ा संदेश भी देश-दुनिया में जाएगा। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ से जुड़ी स्व-सहायता समूहों की दीदियां इस दिशा में एक अनूठी और सराहनीय मिसाल पेश कर रही हैं।

कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन और जिला पंचायत रायगढ़ के सहयोग से पूरे जिले में बड़े पैमाने पर पर्यावरण-अनुकूल (Eco-Friendly) ‘बीज राखियां’ तैयार की जा रही हैं। इस अभिनव पहल को “भाई की कलाई पर प्यार, धरती मां को उपहार” की थीम पर शुरू किया गया है, जो त्योहार के पारंपरिक उल्लास के साथ हरियाली को बढ़ावा देगी।

फेंकने पर अंकुरित होंगे देसी बीज, पौधे का लेंगे रूप

इन खास राखियों की बनावट और उनकी उपयोगिता बेहद अनूठी है, जो प्लास्टिक या केमिकल से बनी बाजारू राखियों का एक बेहतरीन विकल्प हैं:

देसी बीजों का अनूठा क्राफ्ट: इन राखियों को सजाने और तैयार करने के लिए धान, मक्का, भुट्टा, सेमी, करेला और बरबटी जैसे विभिन्न देसी बीजों का बेहद कलात्मक उपयोग किया गया है।

कचरा नहीं, बनेगा पौधा: आमतौर पर त्योहार बीतने के बाद राखियां फेंक दी जाती हैं, जिससे कचरा होता है। लेकिन इन राखियों की विशेषता यह है कि यदि इन्हें उपयोग के बाद मिट्टी में दबा दिया जाए या बाहर फेंक भी दिया जाए, तो इनमें मौजूद देसी बीज बारिश के पानी से अंकुरित होकर एक सुंदर पौधे का रूप ले लेंगे।

गांव-गांव में उत्साह, चुनी जाएगी सर्वश्रेष्ठ राखी

रायगढ़ जिले के सभी सातों विकासखंडों में इस रचनात्मक अभियान को लेकर ग्रामीण महिलाओं और कृषि सखियों में भारी उत्साह देखा जा रहा है। धरमजयगढ़ के ग्राम दुलियामुड़ा-कोयलार में ‘कृष्णा समूह’ की कविता राठिया, लैलूंगा, तमनार के लिबरा गांव की ‘जननी समूह’, घरघोड़ा के बड़ेगुमड़ा की ‘गायत्री समूह’ और पुसौर के पुटकापुरी क्लस्टर सहित बैसपाली, जुनवानी, लोइंग, गोपालपुर और संबलपुरी जैसे गांवों की सैकड़ों महिलाएं इस कार्य में दिन-रात जुटी हुई हैं।

चयन प्रक्रिया और सम्मान: इस नवाचार को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए 20 जुलाई को जिले के सभी सातों विकासखंडों से एक-एक सर्वश्रेष्ठ बीज राखी का चयन किया जाएगा। राखी की आकर्षक डिज़ाइन और देसी बीजों के उपयोग के आधार पर विजेताओं का फैसला होगा।

इसके बाद आगामी 27 जुलाई को आयोजित होने वाले एक विशेष गरिमामय समारोह में सभी विजेता दीदियों को सम्मानित किया जाएगा। इस खास मौके पर ये विजेता महिलाएं स्वयं कलेक्टर सहित जिले के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को अपने हाथों से बनाई हुई यह अनूठी बीज राखी बांधेंगी।

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