छत्तीसगढ़

रेशम से बुना जा रहा आत्मनिर्भरता का ताना-बाना: कोसापालन ने बदली वनांचल के ग्रामीणों की तकदीर

मलबरी और टसर रेशम योजनाओं से मिल रहा सीधा लाभ: महिलाओं को मिला सम्मानजनक रोजगार, सीधे खातों में पहुंची लाखों की राशि

Bol Bharat 24 News: छत्तीसगढ़ के वनांचल जिले नारायणपुर में रेशम विकास एवं विस्तार योजनाएं ग्रामीणों के जीवन में आर्थिक समृद्धि की नई इबारत लिख रही हैं। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित मलबरी और टसर रेशम योजनाओं ने स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए द्वार खोले हैं। इस पहल ने महिलाओं और युवाओं को अपने ही गांव में सम्मानजनक रोजगार देकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाया है। आज नारायणपुर में रेशम उत्पादन केवल कृषि से जुड़ी गतिविधि न रहकर महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है।

जिले के नारायणपुर और कुसरतराई मलबरी केंद्रों के 22.5 एकड़ क्षेत्र में महिला स्व-सहायता समूह उन्नत तकनीकों से रेशम कृमिपालन कर रहे हैं। वर्ष 2025-26 में 4,180 किलोग्राम ककून का सफल उत्पादन किया गया, जिससे जुड़े 47 हितग्राहियों को 7.72 लाख रुपये से अधिक का सीधा भुगतान किया गया। वहीं, नारायणपुर, कुसरतराई, गोटाजुन्हरी और एडका के 62 हेक्टेयर में फैले टसर केंद्रों में 8.52 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 9.73 लाख से अधिक कोसाफल का बम्पर उत्पादन हुआ, जिससे 64 हितग्राहियों को लगभग 36.97 लाख रुपये की आय हुई।

रेशम विभाग द्वारा ग्रामीणों को बीमारियों से बचाव और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन के लिए तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सबसे खास बात यह है कि उत्पादन की राशि सीधे हितग्राहियों के बैंक खातों में भेजी जा रही है, जिससे इस व्यवस्था पर ग्रामीणों का भरोसा और मजबूत हुआ है। नारायणपुर का यह मॉडल साबित करता है कि स्थानीय संसाधनों, प्रशासनिक सहयोग और ग्रामीणों की मेहनत के मेल से सुदूर वनांचल क्षेत्रों में भी विकास और आत्मनिर्भरता का उजाला फैलाया जा सकता है।

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