छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Biodiversity News: प्रदेश की 127 संकटग्रस्त पौध प्रजातियों के संरक्षण की तैयारी, विशेषज्ञों ने किया वैज्ञानिक मूल्यांकन

छत्तीसगढ़ में 127 दुर्लभ एवं संकटग्रस्त पौध प्रजातियों की पहचान की गई। विशेषज्ञों और पारंपरिक वैद्यों की सहभागिता से वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद संरक्षण की कार्ययोजना तैयार होगी।

Chhattisgarh Biodiversity News रायपुर, 1 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली 127 दुर्लभ एवं संकटग्रस्त पौध प्रजातियों की पहचान कर उनके संरक्षण और संवर्धन की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य वन अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान परिसर में छत्तीसगढ़ राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इन प्रजातियों की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया। इसके आधार पर दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं खतरे में श्रेणी के अनुसार सूची तैयार की गई।

127 पौध प्रजातियों के संरक्षण की बनेगी कार्ययोजना

वन मंत्री केदार कश्यप की विशेष पहल से आयोजित इस कार्यशाला में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के आधार पर संकटग्रस्त पौध प्रजातियों की स्थिति का आकलन किया गया। कार्यशाला से प्राप्त वैज्ञानिक प्रमाणों और विशेषज्ञों के सुझावों के आधार पर राज्य जैव विविधता बोर्ड अब इन 127 प्रजातियों को अधिसूचित करने तथा उनके संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्ययोजना तैयार कर आगे की कार्रवाई करेगा।

छत्तीसगढ़ में करीब 3,035 पौध प्रजातियों की सूची तैयार

राज्य जैव विविधता बोर्ड ने स्थानीय विशेषज्ञों के सहयोग से पहले ही छत्तीसगढ़ में लगभग 3,035 पौध प्रजातियों की सूची तैयार की है। कार्यशाला में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए विषय विशेषज्ञों, पारंपरिक वैद्यों, गैर-सरकारी संगठनों के प्रतिनिधियों, विश्वविद्यालयों के प्राध्यापकों और विद्यार्थियों ने अपने-अपने क्षेत्रों में पाई जाने वाली दुर्लभ प्रजातियों की वर्तमान स्थिति से संबंधित जानकारी साझा की। इन जानकारियों और विशेषज्ञों के मूल्यांकन के आधार पर लगभग 127 पौध प्रजातियों के संकटग्रस्त होने की पहचान की गई।

वैज्ञानिक अध्ययन के साथ पारंपरिक ज्ञान भी शामिल

कार्यशाला में प्रतिभागियों को पौधों की पहचान के साथ उनके वैज्ञानिक मूल्यांकन की पद्धति की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों के पैनल ने प्राप्त तकनीकी आंकड़ों का विश्लेषण कर प्रजातियों को दुर्लभ, संकटग्रस्त एवं खतरे में जैसी श्रेणियों में शामिल किया। इस प्रक्रिया में वैज्ञानिक अध्ययन के साथ स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान को भी महत्व दिया गया।

संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास पर जोर

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख अरुण कुमार पांडे ने कहा कि राज्य की संकटग्रस्त पौध प्रजातियों के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं। उन्होंने जैव विविधता के संरक्षण में सभी संबंधित पक्षों की सहभागिता पर जोर दिया।

कार्यशाला में राज्य जैव विविधता बोर्ड के सदस्य सचिव अमिताभ बाजपेयी ने बोर्ड की कार्ययोजनाओं और वैज्ञानिक मूल्यांकन की रूपरेखा प्रस्तुत की। एसएफआरटीआई के निदेशक कौशलेन्द्र कुमार सहित वन विभाग के अधिकारी, विभिन्न संस्थानों के विषय विशेषज्ञ और वैज्ञानिक भी कार्यशाला में शामिल हुए।

कार्यशाला में तैयार सूची के आधार पर अब संकटग्रस्त पौध प्रजातियों के संरक्षण और संवर्धन की दिशा में आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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