छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Tourism News: वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर नई पहचान बनाने की तैयारी, 2028 तक बड़े विस्तार का लक्ष्य

चित्रकोट, सिरपुर, धार्मिक स्थलों और जनजातीय संस्कृति को मिलेगी नई पहचान; पर्यटन में निजी निवेश, रोजगार और International Branding पर जोर

Chhattisgarh Tourism News रायपुर, 25 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ को देश और दुनिया के प्रमुख पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने की दिशा में राज्य सरकार ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने नवा रायपुर स्थित छत्तीसगढ़ संवाद के ऑडिटोरियम में आयोजित प्रेस वार्ता में विभागीय उपलब्धियों और आगामी योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्रदेश की प्राकृतिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और आध्यात्मिक विरासत को नई पहचान दिलाने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आर्थिक अवसर बढ़ाना सरकार की प्राथमिकता है।

प्रेस वार्ता में पर्यटन एवं संस्कृति विभाग के सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड के प्रबंध संचालक सौमिल रंजन चौबे, संस्कृति विभाग के संचालक डॉ. संजय कन्नौजे और टूरिज्म बोर्ड की डीजीएम पूनम शर्मा उपस्थित रहीं।

Tourism Development: निजी निवेश को बढ़ावा देने की तैयारी

मंत्री राजेश अग्रवाल ने बताया कि पिछले लगभग ढाई वर्षों में पर्यटन क्षेत्र में निजी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। फिल्म सिटी निर्माण के लिए 203.53 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को बढ़ावा देने के लिए फिल्म सिटी एवं कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये है।

Religious Tourism: 61 ट्रेनों से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या-काशी पहुंचे

श्री रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया जा चुका है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या और काशी के दर्शन कराए गए हैं। सरकार का लक्ष्य धार्मिक एवं आध्यात्मिक पर्यटन को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है।

Homestay और Local Employment पर फोकस

पर्यटन से होने वाला आर्थिक लाभ स्थानीय परिवारों तक पहुंचाने के लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और युवाओं को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने के अवसर बढ़ेंगे। वर्तमान में करीब 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट तथा 26 होटल पंजीकृत हैं। पर्यटक गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण के माध्यम से कम से कम 500 स्थानीय युवाओं को पर्यटन आधारित रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है।

Chitrakote Tourism: विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने की तैयारी

बस्तर के चित्रकोट को केवल जलप्रपात के रूप में नहीं, बल्कि विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित करने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके अलावा सिरपुर के व्यापक पर्यटन विकास के लिए Integrated Master Plan तैयार किया जा रहा है। मैनपाट और जशपुर में भी पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।

Bhoramdev Corridor: 145.99 करोड़ रुपये स्वीकृत

धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भोरमदेव कॉरिडोर के विकास हेतु भारत सरकार से 145.99 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिली है। रतनपुर महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।

Digital Tourism को मिलेगा विस्तार

पर्यटकों को मोबाइल के माध्यम से यात्रा संबंधी जानकारी और सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पर्यटन विभाग की नई वेबसाइट और मोबाइल ऐप विकसित किए जा रहे हैं। इनमें ऑनलाइन बुकिंग और डिजिटल पर्यटन सूचनाओं को एकीकृत किया जा रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब 6.48 करोड़ रुपये और पर्यटन इकाइयों से करीब 31.75 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।

2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान का लक्ष्य

पर्यटन मंत्री ने कहा कि वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ पर्यटन की नई पहचान देश और दुनिया में स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन के तहत अगले पांच वर्षों में प्रतिवर्ष 100 करोड़ रुपये के वित्तीय प्रावधान की दिशा में काम किया जा रहा है। प्रस्तावित पर्यटन नीति-2026 में Sustainable Development, Private Investment, Community-Based Tourism और Local Participation को प्राथमिकता दी जाएगी।

18 पर्यटन संपत्तियों में Private Partnership

छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 पर्यटन संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के माध्यम से निजी क्षेत्र की भागीदारी से विकसित करने की योजना है। इससे लगभग 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने और प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।

International Branding पर भी जोर

छत्तीसगढ़ की पर्यटन पहचान को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने के लिए International Tourism Platforms पर भागीदारी, फिल्म एवं OTT आधारित प्रचार, International Media Outreach और International Influencer Fam Tours जैसे प्रयास प्रस्तावित हैं। Eco-Ethnic, Natural और Cultural Tourism को राज्य की प्रमुख पहचान के रूप में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

Artists Welfare: कलाकारों को आर्थिक सहायता

संस्कृति विभाग की योजनाओं के तहत कलाकारों और साहित्यकारों के कल्याण पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30.03 लाख रुपये की सहायता दी गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15.30 लाख रुपये की सहायता दी जा चुकी है।

मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के माध्यम से लोकनृत्य, संगीत, लोकनाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी लेखन और अन्य लोककलाओं से जुड़े कलाकारों को संरक्षण एवं आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को करीब 19.08 लाख रुपये प्रदान किए गए हैं।

407 वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को पेंशन

वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों की आर्थिक सुरक्षा के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 आर्थिक रूप से कमजोर वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों को 82.12 लाख रुपये की पेंशन दी गई है। वर्तमान वर्ष में अब तक 121 वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को योजना का लाभ मिला है।

Bastar Pandum से जनजातीय संस्कृति को पहचान

प्रदेश के विभिन्न जिलों में 89 विशिष्ट मेला-मड़ई, उत्सव-महोत्सव एवं समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। जनजातीय संस्कृति के संरक्षण के लिए ‘आदि पर्व’ पंचांग तैयार किया जा रहा है। बस्तर की लोकपरंपरा और जनजातीय संस्कृति को व्यापक पहचान दिलाने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक और जिला स्तर पर बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है।

बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों और पद्मश्री विभूतियों सहित 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात और सम्मान का अवसर मिला।

Cultural Events और Digital Archive से संरक्षण

‘पावस प्रसंग’, ‘रंगतरंग’, ‘रंगपरब’ और ‘लोकरंग पर्व’ जैसे आयोजनों के माध्यम से शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोकवाद्य, लोकनाट्य और पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत एवं देवारगीत जैसी पारंपरिक विधाओं को मंच दिया जा रहा है।

प्रदेश की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के लिए Digital Archive तैयार किया जा रहा है।

सांस्कृतिक संस्थाओं को 7.85 करोड़ रुपये से अधिक की सहायता

पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी सांस्कृतिक एवं साहित्यिक संस्थाओं को 854 आयोजनों के लिए 7.85 करोड़ रुपये से अधिक की आर्थिक सहायता स्वीकृत की गई है।

Film Policy में संशोधन की तैयारी

छत्तीसगढ़ में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म नीति-2021 में आवश्यक संशोधन की प्रक्रिया चल रही है। नई फिल्म नीति के माध्यम से प्रदेश के प्राकृतिक स्थलों पर फिल्म निर्माण को प्रोत्साहन और पात्र फिल्मों को सब्सिडी देने की व्यवस्था को बेहतर बनाने की तैयारी है।

Sirpur को World Heritage की दिशा में आगे बढ़ाने की पहल

सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। सिरपुर की बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं को देखते हुए UNESCO मानकों के अनुरूप Nomination Dossier तैयार कर भारत सरकार को प्रस्तुत किया गया है।

63 संरक्षित स्मारकों के संरक्षण पर काम

प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। वर्तमान वित्तीय वर्ष में 12 स्मारकों के संरक्षण, उन्नयन और पर्यटकीय सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग की कार्ययोजना तैयार की जा रही है।

रायपुर संग्रहालय और पुरखौती मुक्तांगन का होगा उन्नयन

महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय रायपुर में नई ‘रियासत गैलरी’ स्थापित करने और मौजूदा गैलरियों के उन्नयन का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। पुरखौती मुक्तांगन में Light and Sound Show और संध्याकालीन कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

12 लाख पृष्ठों का Digital Record तैयार

छत्तीसगढ़ से संबंधित लगभग 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन्हें वेब अभिलेखागार पोर्टल के माध्यम से आम नागरिकों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध कराने के लिए कैटलॉग एवं मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।

रीवां में 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण

पुरातत्व विभाग द्वारा अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन कराया जा चुका है। रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में उत्खनन से करीब 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण सामने आए हैं। यहां प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से कलचुरी काल तक के अवशेष और विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी तथा तांबे के सिक्के मिले हैं।

मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ में पर्यटन और संस्कृति का विकास केवल नए पर्यटन स्थलों और आयोजनों तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियों, कलाकारों के कल्याण, सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रदेश की पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत करना है। सरकार छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, Eco-Ethnic और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने की दीर्घकालिक योजना पर काम कर रही है।

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