छत्तीसगढ़संस्कृति

Tribal Heritage Award: छत्तीसगढ़ की ‘आदि विरासत’ और वनाधिकार पहल को SKOCH Gold Award

छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास विभाग को ‘AADI VIRASAT’ और ‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ पहल के लिए SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया।

Tribal Heritage Award नई दिल्ली, 26 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ के आदिम जाति विकास विभाग को जनजातीय विरासत के संरक्षण, संग्रहालय निर्माण और वनाधिकारों की निरंतर सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए प्रतिष्ठित SKOCH Gold Award से सम्मानित किया गया है। विभाग को यह सम्मान ‘AADI VIRASAT’ और ‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ जैसी पहलों के लिए मिला है।

इन पहलों का चयन तीन चरणों की प्रस्तुतीकरण और मूल्यांकन प्रक्रिया के साथ पब्लिक वोटिंग के बाद किया गया। परियोजनाओं से जुड़े तत्कालीन टीम लीडर एवं प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने Jury के समक्ष दोनों पहलों का प्रस्तुतीकरण किया। इस अवसर पर संयुक्त सचिव बीके राजपूत और ओएसडी श्रीकांत शुक्ला सहित विभागीय अधिकारी भी मौजूद रहे।

‘AADI VIRASAT’ से जनजातीय इतिहास को डिजिटल तकनीक से जोड़ा

‘AADI VIRASAT’ पहल के तहत दो प्रमुख संग्रहालयों का निर्माण किया गया है। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय और राज्य का पहला जनजातीय संग्रहालय शामिल है। इन संग्रहालयों में जनजातीय इतिहास, वीरता और संस्कृति को डिजिटल तकनीक, AR/VR तथा immersive experiences के माध्यम से प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।

शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री द्वारा किया गया था, जबकि राज्य के पहले जनजातीय संग्रहालय का उद्घाटन मई 2025 में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने किया था।

वनाधिकारों को पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रखने पर जोर

‘मोर वनाधिकार, मोर उत्तराधिकार’ पहल के तहत वनाधिकार को केवल एक बार मिलने वाले अधिकार के बजाय पीढ़ी-दर-पीढ़ी सुरक्षित रहने वाली व्यवस्था के रूप में विकसित करने पर जोर दिया गया है। इसके अंतर्गत उत्तराधिकार, अभिलेखों के अद्यतन और हितग्राहियों को विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ने जैसे पहलुओं पर काम किया गया है।

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और आदिम जाति विकास विभाग के मंत्री रामविचार नेताम ने विभागीय अधिकारियों और पूरी टीम को बधाई दी। उन्होंने इसे छत्तीसगढ़ के जनजातीय समुदायों की विरासत और अधिकारों के संरक्षण की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को मिली राष्ट्रीय पहचान बताया।

Related Articles

Back to top button