छत्तीसगढ़

₹172 करोड़ के ओवरटाईम घोटाले में बड़ी कार्रवाई: CSMCL के पूर्व MD अरुणपति त्रिपाठी गिरफ्तार, EOW को मिली 20 घंटे की रिमांड

आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ ने विशेष कोर्ट में किया पेश; अनवर ढेबर समेत 12 आरोपियों के खिलाफ पहले ही दाखिल हो चुकी है चार्जशीट

रायपुर। छत्तीसगढ़ में आबकारी विभाग से जुड़े एक और बड़े घोटाले को लेकर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) ने एक बड़ी कार्रवाई की है। छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉर्पोरेशन लिमिटेड (CSMCL) के पूर्व प्रबंध निदेशक (MD) अरुणपति त्रिपाठी को ₹172 करोड़ के बहुचर्चित ओवरटाईम भुगतान घोटाला मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है।

मिली जानकारी के अनुसार, EOW की टीम ने पूर्व एमडी को 17 जुलाई को हिरासत में लिया था। इसके बाद शनिवार, 18 जुलाई को उन्हें रायपुर के विशेष न्यायालय में पेश किया गया। EOW ने मामले की विस्तृत कड़ियों को जोड़ने और गहन पूछताछ के लिए अदालत से रिमांड मांगी थी, जिसे स्वीकार करते हुए कोर्ट ने अरुणपति त्रिपाठी को 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है।

क्या है 172 करोड़ का ओवरटाईम घोटाला?

यह पूरा मामला शराब दुकानों में तैनात प्लेसमेंट कर्मचारियों को नियम विरुद्ध तरीके से करोड़ों रुपये के ओवरटाईम भुगतान करने और उसमें भारी वित्तीय अनियमितता बरतने से जुड़ा है:

फर्जीवाड़ा और कमीशनखोरी: जांच एजेंसियों का आरोप है कि प्लेसमेंट कंपनियों के साथ मिलकर करोड़ों रुपये का फर्जी टर्नओवर और ओवरटाईम दिखाया गया, जिसके जरिए सरकारी खजाने को ₹172 करोड़ से अधिक का चूना लगाया गया।

किंगपिन की भूमिका: अरुणपति त्रिपाठी पर सीएसएमसीएल के एमडी पद पर रहते हुए इस पूरे फर्जी भुगतान को वित्तीय और प्रशासनिक मंजूरी देने का गंभीर आरोप है।

अनवर ढेबर समेत 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट

EOW इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए लगातार शिकंजा कस रही है। इस मामले में जांच एजेंसी ने पहले ही विशेष न्यायालय में 12 मुख्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल कर दी है।

मुख्य आरोपियों की सूची: चार्जशीट में प्रदेश के चर्चित कारोबारी अनवर ढेबर के अलावा नवीन प्रताप सिंह तोमर, तिजऊराम निर्मलकर, अभिषेक सिंह, नीरज कुमार चौधरी, अजय लोहिया, अजीत नरबले, अमित प्रभाकर सालुंके, अमित मित्तल, एन उदय राव, राजीव द्विवेदी और संजीव जैन के नाम प्रमुखता से शामिल हैं।

EOW के अधिकारियों का कहना है कि अरुणपति त्रिपाठी से रिमांड अवधि के दौरान आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जाएगी, जिससे इस घोटाले में शामिल कुछ और रसूखदार नौकरशाहों और सफेदपोशों के चेहरों से पर्दा उठने की उम्मीद है।

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