शहरी विकास को नई दिशा: रायपुर के शंकर नगर सहित छत्तीसगढ़ के पांच शहरों में रिडेवलपमेंट के लिए ₹250 करोड़ का टेंडर जारी
हाउसिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट बोर्ड की बड़ी पहल; जर्जर शासकीय परिसंपत्तियों के स्थान पर पीपीआई मॉडल से विकसित होगी आधुनिक अधोसंरचना; मंत्री ओ.पी. चौधरी और अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने बताया 'भविष्य का मॉडल'।

Bol Bharat 24 News- छत्तीसगढ़ में शहरी नियोजन, सुशासन और शासकीय परिसंपत्तियों के इष्टतम उपयोग की दिशा में एक बड़ा और क्रांतिकारी कदम उठाया गया है। छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल (छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड) ने राज्य के विभिन्न प्रमुख शहरों में पांच महत्वाकांक्षी रिडेवलपमेंट परियोजनाओं की शुरुआत के लिए आधिकारिक तौर पर निविदाएं (टेंडर्स) जारी कर दी हैं। छत्तीसगढ़ शासन की नई रिडेवलपमेंट नीति के तहत शुरू हो रही इस योजना के लिए आवास एवं पर्यावरण विभाग को नोडल विभाग और हाउसिंग बोर्ड को नोडल क्रियान्वयन एजेंसी नियुक्त किया गया है। इन परियोजनाओं को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली कैबिनेट से सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के बाद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में अंतिम रूप से अनुमोदित किया गया था।
प्रस्तावित पांचों रिडेवलपमेंट परियोजनाओं का कुल क्षेत्रफल लगभग 19.14 एकड़ है, जिसका वित्तीय वर्ष 2025-26 की संशोधित गाइडलाइन दरों के अनुसार अनुमानित मूल्य लगभग ₹250.30 करोड़ आंका गया है। ये परियोजनाएं प्रदेश के पांच प्रमुख शहरों के प्राइम लोकेशंस पर विकसित की जाएंगी, जिनमें राजधानी रायपुर का बी.टी.आई. रोड (शंकर नगर), महासमुंद का क्लब पारा, राजनांदगांव का कैलाश नगर, कोरबा का कटघोरा तथा बस्तर संभाग के जगदलपुर मुख्यालय का चांदनी चौक फेज-2 शामिल हैं। इस रिडेवलपमेंट मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सरकार पर कोई अतिरिक्त वित्तीय भार नहीं आएगा; बल्कि जर्जर और अनुपयोगी हो चुकी पुरानी सरकारी जमीनों के मूल्य का ही उपयोग वित्तीय संसाधन के रूप में करके नया इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा किया जाएगा।
इस पूरी कड़ी में राजधानी रायपुर के शंकर नगर में बी.टी.आई. ग्राउंड के सामने और सिंधु भवन के समीप प्रस्तावित परियोजना को बेहद खास और ‘मॉडल प्रोजेक्ट’ माना जा रहा है। चूंकि यह इलाका रायपुर का प्रमुख शैक्षणिक, प्रशासनिक और व्यावसायिक केंद्र है, इसलिए यहां आधुनिक अधोसंरचना के विस्तार से शहर का सौंदर्य और कार्यक्षमता दोनों बढ़ेगी। आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने इस संबंध में कहा कि सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) के माध्यम से अनुपयोगी शासकीय परिसंपत्तियों को नागरिक-केंद्रित आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर में बदला जा रहा है। यह मॉडल निजी डेवलपर्स के लिए भी निवेश का एक पारदर्शी और आकर्षक अवसर प्रदान करेगा, जिससे राज्य को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त होगा।
परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण एवं अधोसंरचना विकास मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव ने कहा कि मंडल राज्य में कंस्ट्रक्शन की एक नई कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहा है, जो शहरों के समग्र कायाकल्प (अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन) का प्रयास है। उन्होंने आश्वस्त किया कि बोर्ड पूरी गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ इन पांचों प्रोजेक्ट्स को पूरा करेगा। इसी बीच, प्रशासनिक मुस्तैदी दिखाते हुए छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के आयुक्त अवनीश कुमार शरण ने समय-सीमा (TL) की बैठक में इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इस सफलता को देखते हुए आगामी रिडेवलपमेंट की आठ और नई संभावित परियोजनाओं का विस्तृत प्रस्ताव और डीपीआर शीघ्र तैयार कर शासन के समक्ष प्रस्तुत करें।



