छत्तीसगढ़

नमो ड्रोन दीदी अभियान: जशपुर की महिला किसानों का दल ‘ड्रोन पायलट’ बनने रायपुर रवाना; सीएम विष्णु देव साय ने दिखाई हरी झंडी

तकनीक और मातृशक्ति का संगम: खेती-किसानी को हाई-टेक बनाएंगी ग्रामीण महिलाएं; फसलों पर कम समय में सटीक खाद-कीटनाशक छिड़काव की लेंगी ट्रेनिंग, खुलेंगे स्वरोजगार के नए रास्ते।

NV News जशपुर: छत्तीसगढ़ में ‘नमो ड्रोन दीदी योजना’ (Namo Drone Didi Scheme) के तहत ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि के आधुनिकीकरण को एक नई रफ्तार मिलने जा रही है। कृषि क्षेत्र में आधुनिक तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने और महिला किसानों को तकनीकी रूप से सशक्त बनाने की दिशा में आज जशपुर जिले से एक ऐतिहासिक शुरुआत हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज कुनकुरी स्थित कृषि महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र परिसर से महिला कृषकों के 5 सदस्यीय दल को ‘ड्रोन पायलट प्रशिक्षण’ प्राप्त करने के लिए देश की राजधानी से जुड़े राज्य के मुख्य केंद्र रायपुर के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सभी प्रतिभागी महिलाओं को बधाई देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में तकनीक का यह समावेश समय की मांग है और यह अभियान महिला सशक्तिकरण के साथ-साथ ग्रामीण आत्मनिर्भरता की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।

इस विशेष तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम के महत्व पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि पारंपरिक कृषि के ढर्रे को बदलकर इसे अधिक वैज्ञानिक, प्रभावी और लाभकारी बनाने में ड्रोन तकनीक एक मील का पत्थर साबित हो रही है। हमारी ग्रामीण मातृशक्ति आज खेतों में केवल मजदूरी या पारंपरिक कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब वे आसमान में ड्रोन उड़ाकर आधुनिक खेती का नेतृत्व करेंगी। इस पांच सदस्यीय महिला दल को रायपुर के विशेष प्रशिक्षण संस्थान में ड्रोन संचालन (Drone Flying), उसके रख-रखाव (Maintenance), सुरक्षा मानकों और कृषि कार्यों में इसके व्यावहारिक अनुप्रयोगों का गहन प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं आधिकारिक रूप से प्रमाणित ‘ड्रोन पायलट’ के रूप में अपने गांवों में काम संभालेंगी।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, ड्रोन तकनीक के माध्यम से फसलों पर नैनो यूरिया, नैनो डीएपी और विभिन्न प्रकार के कीटनाशकों का छिड़काव बेहद कम समय में और अत्यधिक सटीकता के साथ किया जा सकता है। पारंपरिक रूप से जहां एक एकड़ खेत में दवा छिड़कने में घंटों का समय और भारी मात्रा में पानी व श्रम बर्बाद होता था, वहीं ड्रोन के जरिए इसे मात्र 7 से 10 मिनट के भीतर पूरा किया जा सकता है। इससे न केवल किसानों के समय, श्रम और इनपुट लागत (उत्पादन लागत) की भारी बचत होती है, बल्कि रसायनों के सीधे मानव संपर्क में न आने से छिड़काव करने वाले व्यक्ति के स्वास्थ्य की भी सुरक्षा होती है। यह तकनीक फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में सीधे तौर पर मददगार है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि इस अभियान के जरिए ग्रामीण अंचलों में महिलाओं के लिए उच्च कौशल वाले स्वरोजगार (Self-Employment) के नए और आकर्षक अवसर पैदा होंगे। प्रशिक्षित ‘ड्रोन दीदियां’ अपने और आसपास के गांवों के अन्य किसानों को सशुल्क कृषि सेवाएं (Custom Hiring Services) उपलब्ध कराकर हर महीने एक सम्मानजनक अतिरिक्त आय अर्जित कर सकेंगी, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति सुदृढ़ होगी। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि महिलाओं की सक्रिय और तकनीकी भागीदारी के बिना विकसित कृषि व्यवस्था की कल्पना अधूरी है। इस गौरवमयी रवानगी कार्यक्रम के दौरान जिला पंचायत अध्यक्ष सालिक साय, कलेक्टर रोहित व्यास, वन विभाग व कृषि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी सहित क्षेत्र के प्रगतिशील किसान और आम नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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