छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में ‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान का दिखने लगा दम: मानसून की बौछारों से लबालब भरे 700 से ज्यादा ‘नवा तरिया’; डबरियों में रुका पानी

जल संरक्षण के साथ-साथ ग्रामीण आजीविका को मिल रही नई रफ्तार; ₹1,600 करोड़ से तैयार हो रहीं 1 लाख से अधिक जल संरचनाएं

रायपुर, 4 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में मानसून की सक्रियता के साथ ही राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के बेहद सुखद और सकारात्मक परिणाम धरातल पर नजर आने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश भर में हो रही अच्छी बारिश के कारण इस अभियान के तहत बनाई गई आजीविका डबरियां, नवा तरिया (नए तालाब) और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से लबालब भरने लगी हैं।

जल संचयन के इस बेहतरीन मॉडल से ग्रामीण इलाकों में न केवल भू-जल स्तर सुधरेगा, बल्कि कृषि, मछली पालन और अन्य आजीविका गतिविधियों को भी एक नई और मजबूत संजीवनी मिल रही है।

15 हजार डबरियां और 700 तालाब पानी से सराबोर

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रदेश भर के गांवों में जल संकट दूर करने और ग्रामीणों की आय बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर जल संरचनाओं का विकास किया गया है:

आजीविका डबरियां: प्रदेश में निर्मित 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां वर्षा जल का प्रभावी ढंग से संचयन कर रही हैं।

नवा तरिया – आय के जरिया: इस विशेष पहल के अंतर्गत विकसित किए गए 700 से अधिक सामुदायिक तालाब पहली अच्छी बारिश में ही पूरी तरह भर चुके हैं। इन तालाबों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन, सिंचाई और बागवानी जैसी आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

मनरेगा से ₹1,600 करोड़ से अधिक का हुआ निवेश

‘मोर गांव-मोर पानी’ अभियान की शुरुआत के बाद से पूरे छत्तीसगढ़ में एक लाख से अधिक जल संरक्षण एवं संवर्धन संरचनाओं का निर्माण युद्ध स्तर पर किया जा रहा है। इन दूरगामी विकास कार्यों पर महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के अंतर्गत अब तक 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है, जिससे ग्रामीण श्रमिकों को बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर ही रोजगार भी मिला है।

वीबीजी रामजी योजना से मिला नया विस्तार

राज्य सरकार जल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी कड़ी में 1 जुलाई से लागू की गई वीबीजी रामजी योजना के तहत भी जल संवर्धन के कार्यों को और रफ्तार दी जा रही है।

योजना का खाका: इस नई योजना में कुल 318 कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 108 कार्य सीधे तौर पर जल संरक्षण से जुड़े हैं। इनका मुख्य उद्देश्य वर्षा जल के एक-एक बूंद को सहेजना और ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ पहुंचाना है।

मानसून के शुरुआती दौर में ही इन तालाबों और डबरियों का पानी से भर जाना यह साबित करता है कि साय सरकार का यह अभियान सिर्फ कागजी नहीं, बल्कि ग्रामीण समृद्धि, पर्यावरण संरक्षण और जल सुरक्षा की दिशा में एक बेहद प्रभावी और दूरदर्शी कदम है।

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