छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: केंद्र सरकार ने मंजूर की 46,500 टन अतिरिक्त डीएपी खाद; खरीफ सीजन में दूर होगी किल्लत
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा के प्रति जताया आभार; खेती-किसानी के सीजन में किसानों को मिली बड़ी राहत

रायपुर, 5 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में मानसून के आगमन और खरीफ सीजन की कृषि गतिविधियों के बीच प्रदेश के लाखों किसानों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। केंद्र सरकार ने राज्य की कृषि आवश्यकताओं और बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए छत्तीसगढ़ को 46,500 टन अतिरिक्त डीएपी (डाय-अमोनियम फास्फेट) खाद आवंटित करने का बड़ा फैसला लिया है।
इस संवेदनशील और किसान-हितैषी फैसले पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा (जेपी नड्डा) के प्रति सहृदय आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार का यह कदम राज्य के अन्नदाताओं को संबल प्रदान करने वाला है।
मुख्यमंत्री की पहल और केंद्र का त्वरित सहयोग
खरीफ सीजन के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर जब किसानों को खेतों में बुआई और रोपाई के लिए बड़े पैमाने पर उर्वरकों की आवश्यकता होती है, तब डीएपी की कमी एक बड़ी चुनौती बन सकती थी। इस स्थिति को पहले ही भांपते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार से राज्य के लिए अतिरिक्त कोटा जारी करने का अनुरोध किया था।
मुख्यमंत्री के इस आग्रह को गंभीरता से लेते हुए केंद्रीय मंत्रालय ने त्वरित कदम उठाया और 46,500 टन की अतिरिक्त खेप को तत्काल मंजूरी दे दी। साय सरकार का कहना है कि केंद्र के इस सहयोग से राज्य में उर्वरकों की आपूर्ति सुचारू रूप से बनी रहेगी और किसी भी जिले में खाद की किल्लत की स्थिति निर्मित नहीं होगी।
सोसायटियों और वितरण केंद्रों में जल्द पहुंचेगी खेप
कृषि विभाग के सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार से आवंटित इस अतिरिक्त डीएपी खाद की खेप को जल्द से जल्द जिलों के सहकारी समितियों (सोसायटियों) और अधिकृत वितरण केंद्रों तक पहुंचाने की प्रशासनिक तैयारी शुरू कर दी गई है।
समय पर इस अतिरिक्त कोटे के मिल जाने से अब किसान बिना किसी परेशानी के अपनी जरूरत के अनुसार डीएपी खाद का उठाव कर सकेंगे। प्रदेश के किसान संगठनों और अन्नदाताओं ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री और केंद्र सरकार के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया है, क्योंकि इससे फसल उत्पादन की लागत और समय पर बुआई सुनिश्चित करने में बड़ी मदद मिलेगी।



