पंडवानी के एक युग का अंत: पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई का निधन; एम्स पहुंचे सीएम विष्णु देव साय ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि, कहा- ‘सांस्कृतिक विरासत के लिए अपूरणीय क्षति’
अंतिम दर्शन करने रायपुर एम्स पहुंचे मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री; शोकाकुल परिवार को बंधाया ढांढस, छत्तीसगढ़ में शोक की लहर

रायपुर, 5 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की माटी की महान कला-साधिका, लोक संस्कृति की संवाहक और पद्म विभूषण से सम्मानित विश्वविख्यात पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई अब हमारे बीच नहीं रहीं। उनके निधन की खबर से पूरे छत्तीसगढ़ सहित देश-विदेश के कला जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।
रविवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), रायपुर पहुंचकर डॉ. तीजन बाई के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया और उन्हें अत्यंत भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दुखद घड़ी में मुख्यमंत्री ने वहां मौजूद डॉ. तीजन बाई के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात की, उन्हें ढांढस बंधाया और अपनी गहरी संवेदनाएं प्रकट कीं।
विश्व पटल पर छत्तीसगढ़ का नाम चमकाने वाली कला-साधिका
शोक संतप्त परिवार और मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने डॉ. तीजन बाई के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा:
“डॉ. तीजन बाई ने अपनी अद्वितीय कला-साधना, दमदार आवाज और विलक्षण अभिनय प्रतिभा के दम पर छत्तीसगढ़ की पावन विधा ‘पंडवानी’ को देश ही नहीं बल्कि पूरे विश्व पटल पर एक विशिष्ट और अमिट पहचान दिलाई। उन्होंने सात समंदर पार छत्तीसगढ़िया संस्कृति का गौरव बढ़ाया था। उनका इस तरह चले जाना छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कला जगत और हमारी सांस्कृतिक विरासत के लिए एक ऐसी अपूरणीय क्षति है, जिसे कभी पूरा नहीं किया जा सकेगा।”
एम्स में दिग्गजों ने किए अंतिम दर्शन
डॉ. तीजन बाई के निधन की सूचना मिलते ही रायपुर एम्स में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों का तांता लग गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के साथ प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, रायपुर ग्रामीण के विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई अन्य वरिष्ठ जनप्रतिनिधि और संस्कृति विभाग के अधिकारी भी एम्स पहुंचे। सभी ने छत्तीसगढ़ की इस महान विभूति के अंतिम दर्शन कर उन्हें नमन किया।
डॉ. तीजन बाई ने पंडवानी को केवल एक कला नहीं बल्कि एक जीवंत गाथा के रूप में दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था। कपालिक शैली में महाभारत के प्रसंगों को जीवंत करने वाली वे पहली महिला कलाकार थीं, जिन्हें भारत सरकार ने पद्म श्री, पद्म भूषण और फिर देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘पद्य विभूषण’ से नवाजा था। उनका निधन लोक कला के एक महान अध्याय का पटाक्षेप है।



