छत्तीसगढ़

Sukma Sports News: सुकमा की बेटी शैली गुप्ता ने अंतरराष्ट्रीय मत्सोगी-डो में जीता गोल्ड मेडल, नक्सल प्रभावित बस्तर से वैश्विक मंच पर भरी उड़ान

अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप के 49 किलो सीनियर वर्ग में जीता स्वर्ण पदक; डिप्टी सीएम अरुण साव और प्रभारी मंत्री केदार कश्यप ने दी बधाई

रायपुर/सुकमा। कभी अपनी भौगोलिक चुनौतियों और नक्सल प्रभावित क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने वाला सुकमा जिला आज खेल, शिक्षा और युवा प्रतिभाओं के दम पर अपनी एक नई और सुनहरी पहचान गढ़ रहा है। जिले की होनहार और जांबाज खिलाड़ी शैली गुप्ता इस बड़े सकारात्मक बदलाव की एक नई मिसाल बनकर उभरी हैं। शैली ने नई दिल्ली के प्रसिद्ध तालकटोरा इंडोर स्टेडियम में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मत्सोगी-डो चैंपियनशिप (International Matsogi-Do Championship) में स्वर्ण पदक (Gold Medal) जीतकर पूरे भारत, छत्तीसगढ़ राज्य और अपने गृह जिले सुकमा का नाम अंतरराष्ट्रीय मंच पर रोशन किया है।

नेपाल, भूटान और बांग्लादेश के खिलाड़ियों को चटाई धूल

इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में शैली गुप्ता ने 49 किलोग्राम सीनियर महिला वर्ग में हिस्सा लिया था। उन्होंने बेहद कड़े और रोमांचक मुकाबलों में नेपाल, भूटान और बांग्लादेश जैसे देशों से आए अंतरराष्ट्रीय स्तर के दिग्गज खिलाड़ियों के बीच उत्कृष्ट और आक्रामक प्रदर्शन किया। शैली ने अपने बेहतरीन खेल कौशल का लोहा मनवाते हुए फाइनल मुकाबले में एकतरफा जीत दर्ज कर स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

इस ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण सफलता पर छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री तथा खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री अरुण साव और सुकमा जिले के प्रभारी मंत्री श्री केदार कश्यप ने शैली गुप्ता को बधाई और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी हैं।

कलेक्टर से की मुलाकात, प्रशासन देगा उच्च शिक्षा में पूरा सहयोग

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाने के बाद शैली गुप्ता ने अपने माता-पिता के साथ सुकमा के कलेक्टर श्री अमित कुमार से सौजन्य मुलाकात की।

कलेक्टर की बधाई: कलेक्टर ने शैली की इस असाधारण उपलब्धि की सराहना करते हुए उन्हें बधाई दी।

भविष्य की गारंटी: प्रशासन की ओर से शैली को आगे की उच्च शिक्षा और खेल करियर में हरसंभव प्रशासनिक व आर्थिक सहयोग देने का पूरा आश्वासन दिया गया।

बदलते सुकमा और बस्तर की नई और सुखद तस्वीर

राज्य शासन द्वारा बस्तर संभाग और विशेष रूप से सुकमा में खेल अधोसंरचना (Sports Infrastructure) के विकास, स्थानीय खिलाड़ियों को आधुनिक कोचिंग, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में जाने के अवसर और सरकारी खेल प्रोत्साहन नीतियों का असर अब धरातल पर साफ दिखाई देने लगा है। सुकमा जैसे दूरस्थ अंचल की एक बेटी की यह बड़ी सफलता दर्शाती है कि यदि सही मार्गदर्शन, दृढ़ संकल्प और प्रशासनिक सहयोग मिले, तो कोई भी बाधा राह नहीं रोक सकती। यह स्वर्ण पदक बस्तर के हजारों युवाओं को बड़े सपने देखने और उन्हें सच करने की एक नई प्रेरणा देगा।

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