छत्तीसगढ़

Inspiring Teacher Story: उफनती नदी पार कर जगा रहे शिक्षा की अलख; हर दिन नाव के सहारे जान जोखिम में डालते हैं शिक्षक

Kanker Ground Report: कांकेर के कोयलीबेड़ा में कोटरी नदी का विकराल रूप; उफनती लहरों के बीच से होकर स्कूल पहुँच रहे शिक्षक

जगदलपुर न्यूज़: बस्तर संभाग के उत्तर बस्तर कांकेर जिले से शिक्षकों के जज़्बे और समर्पण की एक मिसाल सामने आई है। कोयलीबेड़ा विकासखंड के सुदूर ग्रामीण अंचलों में तैनात शिक्षक हर दिन अपनी जान जोखिम में डालकर बच्चों का भविष्य संवारने स्कूल पहुँच रहे हैं। मानसून के मौसम में जब नदियां-नाले उफान पर हैं, तब भी शिक्षकों के कदम डगमगाए नहीं हैं।

क्षेत्र में बहने वाली कोटरी नदी का जलस्तर बारिश के दिनों में काफी बढ़ जाता है और नदी रौद्र रूप ले लेती है। इसके बावजूद शिक्षक रोज सुबह देश के भविष्य को गढ़ने के लिए उफनती कोटरी नदी को छोटी-छोटी नावों के सहारे पार करते हैं। जानलेवा जोखिम के बीच नदी पार करके दूर-दराज के गाँवों में स्थित शासकीय स्कूलों तक पहुँचना इनकी दैनिक दिनचर्या बन चुका है।

स्थानीय ग्रामीणों और शिक्षकों का कहना है कि नदी पर पक्का पुल न होने के कारण बारिश के मौसम में आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाता है। ऐसे में नाव ही एकमात्र सहारा बचती है, जिससे हर समय हादसे का खतरा बना रहता है। इसके बावजूद शिक्षक समय पर स्कूल पहुँचकर बच्चों की कक्षाएं लेते हैं और शिक्षा की अलख जलाए हुए हैं।

इस कठिन परिस्थिति में अपनी जान पर खेलकर कर्तव्य निभाने वाले शिक्षकों के इस जज़्बे की हर तरफ सराहना हो रही है। वहीं, स्थानीय लोगों ने शासन-प्रशासन से मांग की है कि कोटरी नदी पर जल्द से जल्द पक्के पुल का निर्माण कराया जाए, ताकि शिक्षकों, स्कूली विद्यार्थियों और आम ग्रामीणों को इस जानलेवा सफर से निजात मिल सके।

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