Chhattisgarh Urban Local Bodies Rule :छत्तीसगढ़ में ‘पार्षद पति’ व्यवस्था पर नकेल: निकायों में महिला प्रतिनिधियों के परिजनों को प्रतिनिधि बनाने पर रोक

रायपुर, 10 अगस्त। छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में महिला सशक्तिकरण को धरातल पर मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और प्रशासनिक कदम उठाया है। प्रदेश के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में अब ‘पार्षद पति’ या परिजनों का राज पूरी तरह समाप्त कर दिया गया है। राज्य सरकार के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने नियमों में संशोधन करते हुए आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। नए प्रावधानों के तहत अब निर्वाचित महिला जन-प्रतिनिधियों के पति, पुत्र या किसी भी अन्य निकट रिश्तेदार को अनाधिकृत प्रतिनिधि या समन्वयक बनाकर सरकारी कामकाज संभालने और बैठकों में हिस्सा लेने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है।
नगरीय प्रशासन विभाग द्वारा representative नामांकनों से जुड़े नियमों में संशोधन कर नया नियम जोड़ा गया है। इसमें साफ निर्देश हैं कि चुनाव महिला प्रतिनिधि ने जीता है, तो क्षेत्र के विकास कार्यों, शासकीय बैठकों और प्रशासनिक निर्णयों की पूरी जिम्मेदारी भी उन्हीं को निभानी होगी। अब तक कई निकायों में महिला पार्षदों की जगह उनके पति या पारिवारिक सदस्य ही विभागीय बैठकों, सलाहकार समितियों और निरीक्षण कार्यों में शामिल होते थे। हाल ही में रायपुर नगर निगम की बैठक में भी पार्षद पतियों की मौजूदगी का मामला सामने आने के बाद सरकार ने यह कड़ा रुख अपनाया है।
(सरकार) के इस फैसले पर सत्तारूढ़ दल और महिला संगठनों ने खुशी जताते हुए इसे महिला आत्मनिर्भरता और संवैधानिक मूल्यों की दिशा में क्रांतिकारी कदम बताया है। उनका कहना है कि इससे निर्वाचित महिला प्रतिनिधि खुद फैसले लेने के लिए प्रोत्साहित होंगी और निकाय प्रणाली में पारदर्शिता आएगी। वहीं, प्रशासन ने सभी निकायों के आयुक्तों और मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (CMO) को कड़ाई से निर्देश दिए हैं कि आधिकारिक बैठकों में केवल निर्वाचित महिला पार्षदों की ही उपस्थिति सुनिश्चित की जाए और नियमों का उल्लंघन करने पर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।



