CG Rajiv Gandhi Kisan Nyay Yojana New Update: छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए बंपर सरकारी योजना; फसल विविधीकरण पर प्रति एकड़ मिलेंगे ₹15,000, जानिए पूरी प्रक्रिया
राजीव गांधी किसान न्याय योजना / मुख्यमंत्री उन्नत कृषि योजना: धान के बदले दलहन, तिलहन और वृक्षारोपण करने वाले किसानों को मिलेगी बड़ी इनपुट सब्सिडी; पानी और मिट्टी बचाने की अनूठी पहल।

Bol Bharat 24 News रायपुर: छत्तीसगढ़ की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था और किसानों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाने के लिए राज्य की विष्णु देव साय सरकार ने एक बेहद क्रांतिकारी और बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने प्रदेश के अन्नदाताओं के लिए एक बंपर सरकारी प्रोत्साहन योजना को धरातल पर उतारा है, जिसके तहत पारंपरिक धान की खेती छोड़कर अन्य लाभकारी फसलों को अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये की भारी-भरकम इनपुट सब्सिडी (आर्थिक सहायता) प्रदान की जाएगी। सरकार के इस दूरदर्शी कदम का मुख्य उद्देश्य राज्य के किसानों को आर्थिक रूप से अधिक समृद्ध बनाना और खेतों की माटी में दलहन-तिलहन की नई खुशबू घोलकर फसल विविधीकरण (Crop Diversification) को बढ़ावा देना है।
इस विशेष कल्याणकारी योजना के नियमों और गाइडलाइन के अनुसार, यदि कोई किसान अपने खेतों में पारंपरिक रूप से उगाई जाने वाली धान की फसल के स्थान पर अन्य फसलों का चयन करता है, तो वह इस बंपर सब्सिडी का हकदार होगा। इसके तहत धान के बदले कोदो, कुटकी, रागी जैसे मिलेट्स (मोटे अनाज), अरहर, मूंग, उड़द जैसी दलहनी फसलें, अथवा सोयाबीन, मूंगफली, सूरजमुखी और सरसों जैसी तिलहनी फसलों की बुवाई करने पर शासन द्वारा यह नगद प्रोत्साहन राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाएगी। इसके अलावा, जो किसान अपने खेतों के एक हिस्से में फलदार पौधे या वाणिज्यिक वृक्षारोपण (ट्री प्लांटेशन) करेंगे, उन्हें भी इस तीन वर्षीय योजना के तहत यह विशेष लाभ दिया जाएगा।
सरकार ने इस योजना को लागू करने के पीछे एक बहुत बड़ा वैज्ञानिक और पर्यावरणीय कारण भी बताया है। दरअसल, छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में लगातार धान की खेती करने से भूजल स्तर (वाटर टेबल) तेजी से नीचे जा रहा है और मिट्टी की उर्वरा शक्ति भी प्रभावित हो रही है। दलहन और तिलहन जैसी फसलों को उगाने में धान की तुलना में बेहद कम पानी की आवश्यकता होती है, जिससे पानी की हर एक बूंद को बचाना संभव हो सकेगा। इसके साथ ही, इन वैकल्पिक फसलों से जहां एक ओर किसानों की लागत में भारी कमी आएगी, वहीं दूसरी ओर बाजार में दलहन-तिलहन की उच्च मांग होने के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतरीन और मुनाफा देने वाला मूल्य भी प्राप्त होगा।
योजना का लाभ लेने के लिए क्या करना होगा?
इस बंपर सरकारी योजना का लाभ उठाने के लिए छत्तीसगढ़ के इच्छुक किसानों को कुछ बेहद सरल और अनिवार्य प्रक्रियाओं का पालन करना होगा। सबसे पहले किसानों को राज्य सरकार के आधिकारिक कृषि पोर्टल ‘भुइयां’ और ‘राजिव गांधी किसान न्याय योजना / एकीकृत किसान पोर्टल’ पर अपनी भूमि और नई बोई गई फसल के रकबे का ऑनलाइन पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) कराना होगा। इसके बाद स्थानीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी (RAEO) और पटवारी द्वारा मौके पर जाकर फसल का भौतिक सत्यापन (गिरदावरी) किया जाएगा। सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होते ही प्रोत्साहन राशि की निर्धारित किस्तें सीधे डीबीटी (DBT) के माध्यम से किसान के पंजीकृत बैंक खाते में जमा कर दी जाएंगी। आवेदन के लिए आधार कार्ड, बैंक पासबुक और भूमि के खसरा-बी1 के दस्तावेज आवश्यक हैं।



