छत्तीसगढ़

स्वाभिमान और उद्यमशीलता की मिसाल है सिंधी समाज; राज्यपाल रमेन डेका ने ‘मुखी संवाद’ में की शिरकत

पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के राज्यस्तरीय आयोजन में पहुँचे राज्यपाल; प्रदेशभर की 128 सिंधी पंचायतों के प्रतिनिधि एक मंच पर हुए एकजुट

26 जुलाई 2026। सिंधी समाज स्वाभिमान और आत्मनिर्भरता का जीवंत प्रतीक है। विभाजन की विभीषिका और विस्थापन की गहरी पीड़ा सहने के बाद भी इस समाज ने अपने परिश्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर न केवल खुद को पुनर्स्थापित किया, बल्कि देश के निर्माण में भी अग्रणी भूमिका निभाई। यह उद्गार राज्यपाल रमेन डेका ने रायपुर में आयोजित पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत के राज्यस्तरीय ‘मुखी संवाद’ (विचार, तर्क एवं सुझाव परिचर्चा) कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि व्यक्त किए।

विस्थापन के दर्द को ताकत बनाकर रचा इतिहास

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि विभाजन के समय अपनी जन्मभूमि, संपत्ति और सांस्कृतिक धरोहरों को छोड़कर आए सिंधी समाज ने उस असीम वेदना को ही अपनी शक्ति में बदल दिया।

राज्यपाल का संबोधन:

“कठिन परिस्थितियों के बावजूद सिंधी समाज ने अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजते हुए व्यापार, उद्योग, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में देश भर में उल्लेखनीय मुकाम हासिल किया है। समाज की रीढ़ उसकी पंचायतें होती हैं, और आज प्रदेश की 128 पंचायतों का एक मंच पर आना इसकी अद्भुत संगठनात्मक शक्ति को दर्शाता है।”

युवाओं को भाषा और संस्कृति से जोड़ने का आह्वान

राज्यपाल रमेन डेका ने समाज के प्रमुखों और प्रतिनिधियों से अपील की कि वे सिंधी भाषा, लिपि, संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखने के लिए निरंतर प्रयास करें। उन्होंने बच्चों और युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने तथा महिला विंग के माध्यम से महिलाओं को अधिक से अधिक सशक्त बनाने पर विशेष बल दिया।

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने पूज्य छत्तीसगढ़ सिंधी पंचायत को इस सफल आयोजन के लिए बधाई दी। इस अवसर पर संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारी, प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पंचायतों के ‘मुखी’, महिला विंग की सदस्य और बड़ी संख्या में समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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