छत्तीसगढ़

Chhattisgarh State Award: पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के नाम पर दिया जाएगा राज्य अलंकरण पुरस्कार; संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने की बड़ी घोषणा

कला जगत में अतुलनीय योगदान को जीवंत रखने के लिए साय सरकार का ऐतिहासिक निर्णय; परिजनों को दी ₹1 लाख की आर्थिक सहायता

रायपुर, 8 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और कला को वैश्विक पटल पर पहचान दिलाने वाली पंडवानी की महान साधिका स्वर्गीय डॉ. तीजन बाई की स्मृति को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। राजधानी रायपुर में आयोजित एक विशेष सांगीतिक श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल हुए प्रदेश के संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा कि अब छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा पंडवानी के क्षेत्र में विशिष्ट योगदान देने वाले कलाकारों को ‘तीजन बाई राज्य अलंकरण पुरस्कार’ से सम्मानित किया जाएगा।

इस गरिमामयी कार्यक्रम में संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय तीजन बाई के तैलचित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित किए और कला जगत में उनके अद्वितीय व अतुलनीय योगदान को याद किया।

परिजनों को आर्थिक सहायता और पैतृक गाँव के लिए योजनाएँ

श्रद्धांजलि सभा के दौरान संस्कृति मंत्री ने तीजन बाई के प्रति गहरा सम्मान प्रकट करते हुए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं और कार्य किए:

आर्थिक सहायता का चेक: मंत्री राजेश अग्रवाल ने स्वर्गीय तीजन बाई के शोकाकुल परिजनों से मुलाकात कर उन्हें ढांढस बंधाया और शासन की ओर से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया।

स्मृति को चिरस्थायी बनाने की पहल: संस्कृति मंत्री ने कहा कि तीजन बाई छत्तीसगढ़ का गौरव थीं, जिन्होंने देश-विदेश में कापिलिक शैली की पंडवानी का परचम लहराया। उनकी यादों और विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए सहेजने हेतु उनके पैतृक गांव में विभिन्न विकास कार्य और स्मारक संबंधी कदम उठाए जाएंगे।

सांस्कृतिक हलके में खुशी की लहर

संस्कृति मंत्री की इस घोषणा के बाद छत्तीसगढ़ के कला, साहित्य और सांस्कृतिक जगत से जुड़े लोगों ने साय सरकार के इस संवेदनशील निर्णय की सराहना की है। छत्तीसगढ़ में हर वर्ष राज्य स्थापना दिवस (1 नवंबर) के अवसर पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली विभूतियों को राज्य अलंकरण पुरस्कारों से नवाजा जाता है। अब इस सूची में पंडवानी कला के लिए ‘तीजन बाई पुरस्कार’ का जुड़ना राज्य की लोक कला परंपरा के लिए एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

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