छत्तीसगढ़

Digital Policing in Chhattisgarh: थानों में मिलेंगे ई-साइनिंग पैड और जल्द गो-लाइव होगी न्याय श्रुति प्रणाली; सीसीटीएनएस की उच्चस्तरीय समीक्षा में बड़े फैसले

उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने ली संयुक्त बैठक; नए कानूनों के तहत डिजिटल साक्ष्यों, ई-साक्ष्य और मेडलीपार को रफ्तार देने के निर्देश

रायपुर, 21 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में नवीन भारतीय न्याय संहिता के प्रभावी क्रियान्वयन और न्याय प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सरल व त्वरित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा तथा स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने मंगलवार को क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (CCTNS) की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक ली। इस बैठक में सीसीटीएनएस के संचालन में आ रही व्यावहारिक चुनौतियों, विभिन्न डिजिटल मॉड्यूल्स के एकीकरण और पुलिस व न्यायिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने पर गहन मंथन हुआ।

उप मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अपराधों की विवेचना, साक्ष्य संकलन और न्यायालयीन प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल और समयबद्ध बनाना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

डिजिटल पुलिसिंग के लिए लिए गए बड़े निर्णय

बैठक के दौरान राज्य की न्याय प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए:

थानों में ई-साइनिंग पैड (E-Signing Pad): शिकायतकर्ताओं की सुविधा और दस्तावेजों के ऑनलाइन निष्पादन के लिए प्रारंभिक चरण में दुर्ग, बिलासपुर तथा रायपुर कमिश्नरेट के सभी थानों और राज्य के प्रत्येक जिले के दो-दो थानों में इस माह के अंत तक दो-दो ई-साइनिंग पैड उपलब्ध कराए जाएंगे। बाद में इसे पूरे राज्य में लागू किया जाएगा।

‘न्याय श्रुति’ प्रणाली होगी गो-लाइव: न्यायालयीन प्रक्रियाओं में तकनीक के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए उच्च न्यायालय के माध्यम से सभी न्यायाधीशों की आवश्यक आईडी तैयार कर न्याय श्रुति प्रणाली को जल्द से जल्द गो-लाइव किया जाएगा।

ई-साक्ष्य का विशेष प्रशिक्षण: डिजिटल साक्ष्यों के बेहतर संकलन और संरक्षण के लिए राज्य के सभी जिलों में पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए विशेष प्रशिक्षण अभियान चलाया जाएगा।

मेडलीपार से जुड़ेंगे अस्पताल: स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने सभी जिला अस्पतालों को मेडलीपार (MedLEaPR) प्रणाली से जोड़ने और नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए। अगले 3 से 4 महीनों में निजी अस्पतालों को भी चरणबद्ध तरीके से इससे जोड़ा जाएगा ताकि मेडिकल साक्ष्यों का आदान-प्रदान तेजी से हो सके।

आईसीजेएस के पांचों स्तंभ होंगे मजबूत, एफएसएल में होगा सुधार

समन्वय पर जोर:

उप मुख्यमंत्री ने इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के पांचों स्तंभों—पुलिस, न्यायालय, जेल, फॉरेंसिक और अभियोजन तंत्र—के बीच बेहतर तालमेल बिठाने पर जोर दिया।

विधि विज्ञान प्रयोगशाला (FSL) की समीक्षा करते हुए सभी प्रकार की जांचों के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) निर्धारित करने, जांच समय-सीमा घटाने और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भर्ती जल्द पूरी कर लंबित मामलों को शून्य पर लाने के सख्त निर्देश दिए गए। इसके साथ ही एनसीआरबी (NCRB) और एनआईसी (NIC) को मिलकर ऑनबोर्डिंग के दौरान आ रही तकनीकी समस्याओं को तुरंत दूर करने को कहा गया।

इस उच्चस्तरीय बैठक में गृह विभाग की प्रमुख सचिव निहारिका बारिक सिंह, विधि सचिव सुषमा सावंत, गृह सचिव हिमशिखर गुप्ता, पुलिस महानिरीक्षक ध्रुव गुप्ता, एनसीआरबी दिल्ली के वरिष्ठ अधिकारी (वर्चुअल माध्यम से) तथा राज्य शासन के अन्य आला अधिकारी उपस्थित रहे।

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