छत्तीसगढ़

Chhattisgarh Forest Revenue Record: गीदम समिति ने रचा 38 वर्षों का सबसे बड़ा इतिहास; 10,909 रुपये के रिकॉर्ड दाम पर बिका तेंदूपत्ता

वन मंत्री केदार कश्यप ने जताई खुशी; दंतेवाड़ा के 4 हजार वनाश्रित परिवारों को मिलेगा बंपर बोनस, सीधे बैंक खातों में जाएगी रकम

दंतेवाड़ा, 20 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले की प्राथमिक लघु वनोपज सहकारी समिति गीदम ने तेंदूपत्ता व्यापार के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने इस ऐतिहासिक सफलता की जानकारी साझा करते हुए बताया कि राज्य लघु वनोपज संघ द्वारा आयोजित ऑनलाइन टेंडर (निविदा) में गीदम समिति के तेंदूपत्ते को 10,609 रुपये और 10,909 रुपये प्रति मानक बोरा की अब तक की सबसे उच्चतम और रिकॉर्ड कीमत मिली है। समिति के 38 वर्षों के इतिहास में यह अब तक की सर्वाधिक दर है, जो वनाश्रित परिवारों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर है।

4 हजार आदिवासी परिवारों की तिजोरी में बरसेगा बोनस

इस ऐतिहासिक मूल्य वृद्धि और डिजिटल भुगतान प्रणाली के मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

सीधे मिलेगा अतिरिक्त बोनस का लाभ: इस रिकॉर्ड तोड़ बिक्री से प्राप्त होने वाली अतिरिक्त आय का पूरा हिस्सा बोनस के रूप में गीदम समिति से जुड़े लगभग 4,000 तेंदूपत्ता संग्रहक परिवारों को वितरित किया जाएगा। इससे बस्तर अंचल के वनाश्रित परिवारों की क्रय शक्ति बढ़ेगी।

पारदर्शी डिजिटल भुगतान (DBT): वन मंत्री के अनुसार, संग्रहकों को बोनस, छात्रवृत्ति, बीमा और अन्य लघु वनोपज योजनाओं की राशि के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। राज्य सरकार ने डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के जरिए सीधे बैंक खातों में भुगतान की व्यवस्था लागू की है, जिससे कोई बिचौलिया इसमें गड़बड़ी नहीं कर सकता।

सामूहिक प्रयासों से मिली बड़ी कामयाबी

वन अमले की थपथपाई पीठ: इस ऐतिहासिक सफलता पर वन मंत्री केदार कश्यप ने मुख्य वन संरक्षक, दंतेवाड़ा डीएफओ, जिला लघु वनोपज संघ के पदाधिकारियों, फड़ मुंशियों और मैदानी स्तर पर काम करने वाले सभी छोटे-बड़े कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि सरकार की पारदर्शी नीतियों और जमीनी अमले के सामूहिक प्रयासों की वजह से ही पत्तियों की गुणवत्ता बनी रही और व्यापारियों ने इतनी बड़ी बोली लगाई।

सरकार ने प्रतिबद्धता दोहराई है कि राज्य के वनांचलों में रहने वाले आदिवासियों और वनाश्रितों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए लघु वनोपजों (जैसे महुआ, इमली, चारौटा) के मूल्य संवर्धन और सुगम विपणन के लिए भविष्य में भी ऐसे ही कदम उठाए जाते रहेंगे।

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