CG Digital Governance: अब व्हाट्सएप पर मिलेगा खेत का खसरा और बी-1 नक्शा; मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बदली छत्तीसगढ़ की राजस्व व्यवस्था
किसानों को मिली पटवारी दफ्तरों के चक्करों से बड़ी राहत, तकनीक से आई पारदर्शिता; कुछ ही सेकंड में मोबाइल पर डाउनलोड हो रहे जरूरी सरकारी दस्तावेज

रायपुर, 18 जुलाई 2026। छत्तीसगढ़ में सुशासन (Good Governance) अब सिर्फ फाइलों और भाषणों तक सीमित एक नारा नहीं रह गया है, बल्कि आम नागरिकों और विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों के जीवन में प्रत्यक्ष रूप से महसूस की जाने वाली एक बड़ी जमीनी वास्तविकता बन चुका है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में राज्य की राजस्व व्यवस्था ने तकनीक आधारित पारदर्शिता और सरलता को पूरी मजबूती से अपनाया है। प्रशासनिक कार्यप्रणाली में किया गया यह अनूठा सुधार आम जनता के प्रति राज्य सरकार की संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश कर रहा है।
तहसील और पटवारी दफ्तरों के चक्करों से मिली स्थायी मुक्ति
अतीत की जटिल प्रशासनिक व्यवस्था और वर्तमान में हुए इस बड़े तकनीकी चमत्कार का पूरा विवरण इस प्रकार है:
पुरानी जटिल प्रक्रिया का खात्मा: पहले के समय में किसानों को अपने ही खेत का खसरा, बी-1 नक्शा या ऋण पुस्तिका जैसे बेहद बुनियादी दस्तावेज प्राप्त करने के लिए तहसील कार्यालयों और पटवारियों के चक्कर लगाने पड़ते थे। इस पुरानी प्रक्रिया में किसानों का काफी समय बर्बाद होता था, लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ता था और अनावश्यक बिचौलियों की जटिलताओं का सामना करना आम बात थी।
व्हाट्सएप पर शासकीय दस्तावेज: साय सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को उलटते हुए एक बड़ा चमत्कार कर दिखाया है। अब जो सरकारी दस्तावेज कभी बड़ी मुश्किल से हासिल होते थे, वे देश के सबसे लोकप्रिय और सरल मैसेंजर माध्यम व्हाट्सएप (WhatsApp) पर उपलब्ध करा दिए गए हैं। राज्य का कोई भी किसान अब घर बैठे अपने मोबाइल फोन से कुछ ही सेकंड के भीतर अपनी जमीन से जुड़े डिजिटल हस्ताक्षरित (Digitally Signed) और प्रमाणित दस्तावेज डाउनलोड कर सकता है।



