छत्तीसगढ़

Women Empowerment News: वन संरक्षण में नया इतिहास: छत्तीसगढ़ में महिला कमांडो दल ने संभाली जंगल की कमान, पर्यावरण संरक्षण का बना अनूठा मॉडल

बलौदाबाजार-भाटापारा जिले के ग्राम धमनी की महिलाओं ने पेश की मिसाल; चित्रोत्पला महानदी के किनारे सजगता से कर रहीं वन्यजीवों और जंगलों की रक्षा; अब इको-टूरिज्म को मिलेंगे नए पंख।

Bol Bharat 24 News- छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार-भाटापारा जिले से महिला सशक्तिकरण, सामुदायिक भागीदारी और पर्यावरण संरक्षण की एक बेहद खूबसूरत और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जिले के विकासखंड पलारी के अंतर्गत पवित्र चित्रोत्पला महानदी के तट पर बसे ग्राम धमनी के ग्रामीणों ने वन संपदा को बचाने के लिए एक अनूठा इतिहास रच दिया है। यह गांव अब केवल अपनी प्राकृतिक हरियाली के लिए नहीं, बल्कि अपनी सामूहिक चेतना और इच्छाशक्ति के कारण पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण के एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरकर सामने आया है। यहां के ग्रामीणों ने जंगलों को महज पेड़ों का झुंड मानने के बजाय उसे अपनी संस्कृति, धरोहर और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के रूप में सहेजने का अटूट संकल्प लिया है।

इस पूरे महा-अभियान की सबसे मजबूत कड़ी गांव की वे जागरूक महिलाएं हैं, जिन्होंने खुद को ‘महिला कमांडो दल’ के रूप में संगठित किया है। हाथों में लाठियां थामे और अनुशासन के सांचे में ढली ये महिला कमांडो रोज सुबह-शाम जंगलों में गश्त (पेट्रोलिंग) करती हैं। इनकी सजगता का ही नतीजा है कि क्षेत्र में अवैध रूप से पेड़ों की कटाई, जंगलों में लगने वाली आग और लकड़ी तस्करों के हौसले पूरी तरह पस्त हो चुके हैं। यह महिला कमांडो दल न केवल हरे-भरे पेड़ों की रक्षा कर रहा है, बल्कि जंगल में स्वच्छंद विचरण करने वाले वनों के मूक जीव-जंतुओं और पक्षियों के लिए एक सुरक्षित सुरक्षा कवच भी बन गया है।

ग्राम धमनी के इस अनूठे प्रयास में युवाओं और बुजुर्गों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है। ग्रामीणों की इसी सजगता और पर्यावरण के प्रति अगाध प्रेम के कारण सालों से उपेक्षित पड़े इस जंगली क्षेत्र में जैव विविधता (Biodiversity) तेजी से लौट आई है। विलुप्त हो रहे कई स्थानीय पेड़-पौधे और वन्यजीव अब इस संरक्षित जंगल में सुरक्षित रूप से फल-फूल रहे हैं। स्थानीय वन विभाग और जिला प्रशासन ने भी ग्रामीणों के इस जज्बे की सराहना करते हुए इसे ‘कम्युनिटी फॉरेस्ट मैनेजमेंट’ का सबसे बेहतरीन उदाहरण माना है। प्रशासन अब इस क्षेत्र को और अधिक विकसित करने के लिए तकनीकी और बुनियादी सहायता मुहैया कराने की योजना पर काम कर रहा है।

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जंगल संरक्षण की इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब इस पूरे अंचल में पर्यटन (इको-टूरिज्म) के विकास को नए पंख मिलने जा रहे हैं। चित्रोत्पला महानदी का किनारा और महिलाओं द्वारा संरक्षित यह सघन हरा-भरा जंगल अब प्रकृति प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक नए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। शासन की योजना है कि इस क्षेत्र को एक विलेज टूरिज्म और नेचर ट्रेल के रूप में विकसित किया जाए, जिससे स्थानीय युवाओं और महिला कमांडो समूहों के लिए रोजगार व आजीविका के नए साधन उपलब्ध हो सकें। धमनी गांव ने साबित कर दिया है कि यदि समाज ठान ले, तो सरकार पर निर्भर रहे बिना भी प्रकृति और पर्यावरण का कायाकल्प किया जा सकता है।

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