Governance Article : ढाई साल में छत्तीसगढ़ के श्रमिक कल्याण मॉडल को मिली नई पहचान, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण बना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन के नेतृत्व में 17.82 लाख श्रमिकों को मिला 800 करोड़ से अधिक का हितलाभ; 'श्रमेव जयते' ऐप व पोर्टल से सुदृढ़ हुआ पारदर्शी ढांचा

रायपुर, 7 अगस्त। छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते ढाई वर्षों में श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सुशासन, पारदर्शिता और तकनीकी नवाचार के बल पर ऐतिहासिक उपलब्धियां हासिल की हैं। जनसंपर्क विभाग के संयुक्त संचालक छगन लाल लोन्हारे द्वारा जारी विशेष लेख के अनुसार, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और श्रम एवं उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन के मार्गदर्शन में राज्य के संगठित, असंगठित और निर्माण श्रमिकों के लिए 67 कल्याणकारी योजनाओं का प्रभावी संचालन किया जा रहा है। पारदर्शी सेवाओं के लिए ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप और ऑनलाइन पोर्टल के जरिए प्रक्रियाओं को सुगम बनाया गया है।
विभाग की प्रशासनिक क्षमता को सुदृढ़ करते हुए राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन सुनिश्चित किया गया है, जिसके अंतर्गत 5 नए जिलों में श्रम अधिकारी कार्यालय हेतु 20 नए पदों का सृजन किया गया। 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 के बीच 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया और लगभग 17.82 लाख श्रमिकों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से ₹800 करोड़ से अधिक की सहायता राशि वितरित की गई। इसमें निर्माण श्रमिकों को ₹780 करोड़ तथा असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को ₹187 करोड़ का संबल प्रदान किया गया है।
श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा के तहत मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता राशि को बढ़ाकर ₹1.50 लाख किया गया है। 24×7 संचालित ‘मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र’ और मोबाइल शिविरों से दूरस्थ क्षेत्रों तक सेवाएं पहुंची हैं। वहीं ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ के तहत 1.60 लाख से अधिक महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता और ‘शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ के जरिए मात्र ₹5 में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही बच्चों के लिए मेधावी शिक्षा सहायता, छात्रवृत्ति और निःशुल्क प्रतियोगी परीक्षा कोचिंग जैसी पहलों से श्रमिक परिवारों को आत्मनिर्भरता की नई दिशा मिली है।



